सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत ने पैलेट गन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की मांग करने वाले याचिकाकर्ताओं से सवाल किया कि यदि कानून-व्यवस्था की अत्यंत गंभीर स्थिति उत्पन्न हो जाए, तो पुलिस के पास क्या विकल्प होगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पैलेट गन का उपयोग केवल असाधारण परिस्थितियों में ही किया जाना चाहिए।
सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि घटना से संबंधित रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के गोला-बारूद का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाए। अदालत ने कहा कि यह रिकॉर्ड मामले की निष्पक्ष जांच के लिए महत्वपूर्ण होगा और इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि किस परिस्थिति में और कितनी मात्रा में पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया।
याचिका में प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी। साथ ही घायल लोगों को मुआवजा, बेहतर चिकित्सा सुविधा और पुनर्वास उपलब्ध कराने की भी मांग की गई। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फिलहाल सबसे पहले घायल लोगों का समुचित इलाज सुनिश्चित किया जाना चाहिए। अदालत ने संकेत दिया कि पीड़ितों के उपचार और राहत को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी भी भीड़ नियंत्रण उपाय का इस्तेमाल कानून के दायरे में और आवश्यकता के अनुरूप होना चाहिए। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि पैलेट गन का उपयोग सामान्य परिस्थितियों में नहीं, बल्कि केवल दुर्लभ और असाधारण हालात में ही किया जा सकता है।
यह मामला हाल के प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन से घायल हुए कुछ लोगों की याचिका के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि पैलेट गन के इस्तेमाल से कई लोगों को गंभीर चोटें आईं और इसलिए इस प्रकार के हथियार के इस्तेमाल पर रोक लगाई जानी चाहिए। दूसरी ओर, अदालत ने अंतिम निर्णय देने से पहले सभी तथ्यों और रिकॉर्ड की जांच को आवश्यक बताया।
फिलहाल मामले की सुनवाई जारी है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से संबंधित रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और मामले की आगे की प्रक्रिया में सहयोग करने को कहा है। अब इस मामले में अदालत की अगली सुनवाई और सरकार के जवाब पर सभी की नजरें टिकी हैं।





