फूलन देवी भारतीय राजनीति और सामाजिक इतिहास की सबसे चर्चित हस्तियों में से एक रही हैं। उनका जीवन संघर्ष, विवाद, हिंसा और सामाजिक असमानता के बीच आगे बढ़ने की कहानी है। उन्हें कुछ लोग उत्पीड़न के खिलाफ लड़ने वाली महिला के रूप में देखते हैं, जबकि अन्य लोग उनके जीवन से जुड़े आपराधिक मामलों के कारण उन्हें विवादास्पद व्यक्तित्व मानते हैं।
फूलन देवी का जन्म 10 अगस्त 1963 को उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के एक गरीब निषाद (मल्लाह) परिवार में हुआ था। बचपन आर्थिक तंगी और सामाजिक भेदभाव के बीच बीता। कम उम्र में उनका विवाह कर दिया गया, जहां उन्हें कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। बाद में वे अपने मायके लौट आईं, लेकिन उनका जीवन लगातार संघर्षों से घिरा रहा।
युवावस्था में उनका नाम डकैतों के एक गिरोह से जुड़ा। इसके बाद वे राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आईं। उनके जीवन से जुड़ी सबसे चर्चित घटनाओं में 1981 का बेहमई हत्याकांड भी शामिल है। इस मामले में उन पर कई लोगों की हत्या का आरोप लगा। हालांकि, उन्होंने अपने साथ हुए उत्पीड़न और हिंसा का भी उल्लेख किया। इस घटना को लेकर वर्षों तक कानूनी और सामाजिक बहस होती रही।
साल 1983 में फूलन देवी ने मध्य प्रदेश सरकार के समक्ष आत्मसमर्पण किया। इसके बाद उन्होंने करीब 11 वर्ष जेल में बिताए। 1994 में बिना मुकदमा पूरा हुए उन्हें रिहा कर दिया गया। रिहाई के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा।
1996 में फूलन देवी पहली बार उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर से लोकसभा सदस्य चुनी गईं। बाद में 1999 में वे दोबारा सांसद बनीं। सांसद के रूप में उन्होंने गरीबों, महिलाओं और वंचित समुदायों के मुद्दे उठाने की कोशिश की।
25 जुलाई 2001 को नई दिल्ली स्थित उनके सरकारी आवास के बाहर उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस मामले में मुख्य आरोपी शेर सिंह राणा को गिरफ्तार किया गया और बाद में अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया।




