नई दिल्ली। दिल्ली में आयोजित सीजेपी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ‘रावण’ ने प्रदर्शनकारी युवाओं का समर्थन करते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रखना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और सरकार को प्रदर्शनकारियों की मांगों को गंभीरता से सुनना चाहिए।
चंद्रशेखर आज़ाद ने कहा कि देश का युवा रोजगार, शिक्षा और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया की मांग कर रहा है। यदि युवा अपनी समस्याओं को लेकर सड़क पर उतरने के लिए मजबूर हैं, तो सरकार को आत्ममंथन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि युवाओं की आवाज को दबाने के बजाय उनसे संवाद स्थापित किया जाना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय से कई सरकारी भर्तियां लंबित हैं और परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं ने अभ्यर्थियों का भरोसा कमजोर किया है। उनका कहना था कि सरकार को भर्ती प्रक्रियाओं में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए और रिक्त पदों पर जल्द नियुक्तियां करनी चाहिए।
नगीना सांसद ने कहा कि लोकतंत्र की ताकत संवाद और संविधान में निहित है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले युवाओं की बात नहीं सुनेगी, तो असंतोष बढ़ेगा। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से भी अपील की कि वे अपना आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से जारी रखें।
चंद्रशेखर आज़ाद ने यह भी कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। उनके अनुसार, सरकार और विपक्ष दोनों की जिम्मेदारी है कि वे मिलकर रोजगार, शिक्षा और भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी समस्याओं का स्थायी समाधान निकालें।
प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में छात्र, अभ्यर्थी और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। इस मुद्दे पर कई विपक्षी नेताओं ने भी प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया और सरकार से उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की।
हालांकि, सरकार की ओर से प्रदर्शन को लेकर कहा गया है कि युवाओं के हित में कई कदम उठाए जा रहे हैं और भर्ती प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी बनाने के प्रयास लगातार जारी हैं। वहीं, प्रदर्शनकारी संगठन अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और समाधान होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं।
चंद्रशेखर आज़ाद ‘रावण’ के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में बहस और तेज हो गई है। एक ओर विपक्ष इसे युवाओं की आवाज बता रहा है, जबकि सत्तापक्ष का कहना है कि सरकार युवाओं के हितों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियां और बढ़ने की संभावना है।




