32 साल बाद सुलझा किशाऊ परियोजना का जल विवाद, 6 राज्यों ने समझौते पर किए हस्ताक्षर

किशाऊ बहुउद्देश्यीय परियोजना को लेकर करीब 32 साल से चला आ रहा जल विवाद अब सुलझ गया है। 15 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के मुख्यमंत्रियों ने परियोजना को लेकर समझौते पर हस्ताक्षर किए। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की मौजूदगी में यह समझौता हुआ। लंबे समय से पानी के बंटवारे, परियोजना की लागत और राज्यों के हिस्से को लेकर सहमति नहीं बन पा रही थी। अब छह राज्यों के बीच सहमति बनने के बाद किशाऊ परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ है।

किशाऊ परियोजना हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा के पास टोंस नदी पर प्रस्तावित है। टोंस नदी यमुना की प्रमुख सहायक नदियों में शामिल है। इस परियोजना में करीब 1,786 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी संग्रहित करने की क्षमता होगी, जिसमें लगभग 1,324 मिलियन क्यूबिक मीटर उपयोगी जल भंडारण होगा। परियोजना से करीब 422 मेगावाट बिजली पैदा करने की योजना है। समझौते के तहत हरियाणा को 633 MCM, उत्तर प्रदेश को 411 MCM, राजस्थान को 124 MCM और दिल्ली को 80 MCM पानी मिलने का प्रावधान है। वहीं, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश भी परियोजना से जुड़े लाभ प्राप्त करेंगे। परियोजना से लगभग 97 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई को फायदा मिलने की उम्मीद है।

किशाऊ परियोजना का महत्व केवल बिजली और सिंचाई तक सीमित नहीं है। इससे यमुना नदी में पानी के प्रवाह को बढ़ाने और दिल्ली समेत कई क्षेत्रों की जल उपलब्धता को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है। परियोजना के जल घटक की लागत का 90 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार वहन करेगी, जबकि बाकी 10 प्रतिशत राशि संबंधित छह राज्यों द्वारा साझा की जाएगी। 32 साल से लंबित इस समझौते के बाद अब परियोजना को आगे की मंजूरी के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल के सामने रखा जा सकता है। सरकार को उम्मीद है कि परियोजना के पूरा होने से क्षेत्र में सिंचाई, पेयजल और बिजली की जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।