ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब ईरान के विमानन क्षेत्र पर भी दिखाई दे रहा है। अमेरिका ने ईरानी एयरलाइंस को लेकर सख्त चेतावनी जारी की है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि 23 सितंबर से ईरान की एयरलाइंस को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सेवाएं जारी रखने में बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। अमेरिका ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो देश या विदेशी कंपनियां ईरानी एयरलाइंस की मदद करेंगी, उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट के मुताबिक, ईरानी विमानों को ईंधन उपलब्ध कराने, एयरपोर्ट पर लैंडिंग और ग्राउंड हैंडलिंग जैसी सेवाएं देने वाली विदेशी कंपनियां भी अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में आ सकती हैं। इसके अलावा टिकटिंग और दूसरी विमानन सेवाओं से जुड़ी कंपनियों पर भी दबाव बनाया जा सकता है। अमेरिका की चेतावनी का सीधा असर उन देशों और कंपनियों पर पड़ सकता है, जो ईरानी विमानों के अंतरराष्ट्रीय संचालन में सहयोग करती हैं।
अमेरिका पहले ही ईरान के विमानन क्षेत्र से जुड़ी कई संस्थाओं और एयरलाइंस पर प्रतिबंध लगा चुका है। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि ईरान का विमानन नेटवर्क सैन्य सामान, हथियारों और सैन्य कर्मियों की आवाजाही के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसी वजह से अमेरिका ईरानी एयरलाइंस और उनसे जुड़ी सेवाओं पर लगातार दबाव बढ़ा रहा है।
इसका असर कुछ अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर पहले से दिखाई देने लगा है। कई विदेशी एयरलाइंस ने ईरान के लिए अपनी सेवाएं कम की हैं या कुछ रूटों पर उड़ानें रोक दी हैं। तुर्की एयरलाइंस ने भी ईरान के लिए अपनी उड़ानों को मार्च 2027 तक रोकने का फैसला किया है। इसके अलावा कुछ यूरोपीय एयरलाइंस की सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं। ईरान की एयरलाइंस को दूसरे देशों में एयरपोर्ट, ईंधन और ग्राउंड सर्विस जैसी जरूरी सुविधाएं हासिल करने में मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
इराक में भी अमेरिकी प्रतिबंधों का असर दिखाई दे रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, इराक ने अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में आने वाली कुछ ईरानी एयरलाइंस की उड़ानों को रोकने का फैसला किया है। इससे ईरान से इराक के धार्मिक स्थलों की यात्रा करने वाले यात्रियों पर भी असर पड़ सकता है।
हालांकि, 23 सितंबर से ईरान के सभी विमानों पर दुनिया भर में सीधा प्रतिबंध लगने का मतलब नहीं है। असल स्थिति यह है कि अमेरिका उन कंपनियों और सेवाओं पर कार्रवाई की चेतावनी दे रहा है, जिनके सहयोग के बिना ईरानी एयरलाइंस के लिए अंतरराष्ट्रीय उड़ानें संचालित करना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि कितने देश और विमानन सेवा प्रदाता अमेरिकी दबाव के बावजूद ईरान के साथ अपना सहयोग जारी रखते हैं।
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच विमानन क्षेत्र पर यह दबाव ईरान की अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी को प्रभावित कर सकता है। 23 सितंबर के बाद ईरानी एयरलाइंस की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों और उन्हें मिलने वाली विदेशी सेवाओं की स्थिति पर सभी की नजर रहेगी।





