शी जिनपिंग से ‘सुपर इंटेलिजेंस’ पर चर्चा के बाद ट्रंप का यू-टर्न, चीन के साथ AI मिलाने से इनकार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की हालिया मुलाकात में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI अहम मुद्दों में शामिल रहा। दोनों नेताओं ने AI के भविष्य, इसके जोखिम और इससे जुड़े संभावित फायदे पर चर्चा की। बातचीत के बाद अमेरिका और चीन ने AI से जुड़ी गंभीर घटनाओं के लिए एक-दूसरे से सीधे संपर्क का चैनल बनाने और ‘सुपर इंटेलिजेंस’ पर अलग संवाद शुरू करने पर सहमति जताई। हालांकि, इसके तुरंत बाद ट्रंप ने साफ कर दिया कि अमेरिका अपनी AI तकनीक को चीन के साथ मिलाकर आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं है।

ट्रंप ने 26 सितंबर को कहा कि अमेरिका AI के क्षेत्र में चीन से काफी आगे है और वह अपनी बढ़त को बनाए रखना चाहता है। उन्होंने कहा कि वह चीन के साथ AI प्रयासों को ‘इंटीग्रेट’ नहीं करना चाहते, क्योंकि जब कोई देश किसी तकनीक में आगे होता है तो वह अपनी बढ़त को दूसरे देश के साथ साझा नहीं करता। ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका AI के विकास की रफ्तार को कम नहीं करेगा।

इससे पहले ट्रंप और शी जिनपिंग की बातचीत के बाद दोनों देशों ने AI के लिए ‘Artificial Intelligence’ की जगह ‘Super Intelligence’ यानी ‘SI’ शब्द इस्तेमाल करने पर सहमति जताई थी। इसके साथ ही US-China Super Intelligence Dialogue शुरू करने का फैसला हुआ है। इस संवाद में AI से जुड़ी तकनीक के जोखिम और संभावित फायदे पर बातचीत होगी और अगली बैठक नवंबर 2026 तक होने की बात कही गई है।

चीन की ओर से AI के जिम्मेदार इस्तेमाल और मानव नियंत्रण पर जोर दिया गया है। वहीं, अमेरिका ने AI से जुड़े जोखिमों पर बातचीत के लिए संपर्क का रास्ता खुला रखा है, लेकिन तकनीक को साझा करने या दोनों देशों के AI प्रयासों को एक साथ मिलाने पर सहमति नहीं बनी है। ऐसे में दोनों देशों के बीच AI को लेकर संवाद और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा, दोनों साथ-साथ चलती दिखाई दे रही हैं।

कुल मिलाकर, ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच AI पर बातचीत के बावजूद अमेरिका अपनी तकनीकी बढ़त को चीन के साथ साझा करने के बजाय उसे बनाए रखने पर जोर दे रहा है। वहीं, दोनों देश AI से जुड़े संभावित जोखिमों और गंभीर घटनाओं पर संपर्क बनाए रखने के लिए एक नया संवाद तंत्र जरूर तैयार कर रहे हैं।