वैज्ञानिकों ने एक ऐसे फंगस के बारे में पता लगाया है जो मादा फल मक्खियों को संक्रमित करने के बाद उनके व्यवहार में बदलाव कर देता है और अंततः उनकी मौत के बाद उनके शरीर को नई मक्खियों तक संक्रमण पहुंचाने के लिए इस्तेमाल करता है। इस फंगस का नाम Entomophthora muscae है और यह लंबे समय से वैज्ञानिकों के लिए दिलचस्प विषय रहा है।
शोध के मुताबिक, फंगस के बीजाणु जब किसी मक्खी के शरीर में पहुंचते हैं तो वे धीरे-धीरे उसके शरीर के अंदर बढ़ने लगते हैं। संक्रमण बढ़ने के साथ फंगस मक्खी के शरीर और व्यवहार पर नियंत्रण करने लगता है। संक्रमित मक्खी आखिरकार ऐसी जगह पहुंच सकती है जो फंगस के लिए उसके बीजाणुओं को फैलाने के लिहाज से अनुकूल होती है।सबसे हैरान करने वाला हिस्सा मक्खी की मौत के बाद शुरू होता है। फंगस संक्रमित मक्खी के शरीर से बड़ी संख्या में बीजाणु बाहर निकालता है। ये बीजाणु आसपास से गुजरने वाली स्वस्थ मक्खियों के शरीर पर पहुंच सकते हैं और उन्हें भी संक्रमित कर सकते हैं। इस तरह मृत मक्खी का शरीर फंगस के जीवन-चक्र का एक अहम हिस्सा बन जाता है।
वैज्ञानिकों ने यह भी पाया है कि यह फंगस मादा मक्खियों को खास तौर पर प्रभावित करने की एक अनोखी रणनीति अपना सकता है। संक्रमण के अंतिम चरण में संक्रमित मादा मक्खी के शरीर से ऐसे रासायनिक संकेत निकल सकते हैं जो नर मक्खियों को उसकी ओर आकर्षित करते हैं। नर जब मृत या मर रही मादा के संपर्क में आते हैं, तो फंगस के बीजाणु उनके शरीर तक पहुंच सकते हैं और संक्रमण का अगला चरण शुरू हो सकता है।
यानी फंगस सिर्फ अपने मेजबान को मारकर नहीं रुकता, बल्कि उसकी मौत को अपने प्रसार के लिए इस्तेमाल करता है। यही वजह है कि वैज्ञानिक इस प्रक्रिया को अक्सर ‘ज़ॉम्बी’ जैसी रणनीति के रूप में वर्णित करते हैं।
हालांकि यह किसी साइंस-फिक्शन फिल्म जैसा सुनाई देता है, लेकिन इस तरह के परजीवी फंगस प्रकृति में वास्तविक हैं। वे कीड़ों के व्यवहार और शरीर की जैविक प्रक्रियाओं को प्रभावित कर अपने जीवन-चक्र को पूरा करते हैं। इंसानों के लिए इस फंगस से ऐसी ‘ज़ॉम्बी’ स्थिति पैदा होने का कोई सबूत नहीं है।
इस खोज से वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिल सकती है कि परजीवी जीव अपने मेजबान के व्यवहार को किस तरह बदलते हैं और संक्रमण फैलाने के लिए किस तरह की जटिल रणनीतियां विकसित करते हैं। छोटी सी मक्खी के शरीर में होने वाली यह प्रक्रिया दिखाती है कि प्रकृति में जीवों के बीच परजीवी संबंध कितने असाधारण और जटिल हो सकते हैं।





