विधान परिषद की 11 सीटों पर चुनाव, सपा के वजूद और NDA के दबदबे की परीक्षा

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले विधान परिषद की 11 सीटों पर होने वाला चुनाव राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है। इन सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान होगा, जबकि 27 अक्टूबर को नतीजे घोषित किए जाएंगे। चुनाव की अधिसूचना 29 सितंबर को जारी होगी और उम्मीदवार 6 अक्टूबर तक नामांकन दाखिल कर सकेंगे।

इन 11 सीटों में 5 सीटें स्नातक निर्वाचन क्षेत्र और 6 सीटें शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की हैं। स्नातक क्षेत्र में लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मेरठ और इलाहाबाद-झांसी सीट शामिल हैं। वहीं शिक्षक क्षेत्र में लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मेरठ, बरेली-मुरादाबाद और गोरखपुर-फैजाबाद सीटों पर चुनाव होना है। इन सीटों पर मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 6 दिसंबर को समाप्त हो रहा है।

इस चुनाव का सीधा असर समाजवादी पार्टी की विधान परिषद में स्थिति पर पड़ सकता है। 100 सदस्यीय विधान परिषद में सपा के फिलहाल 10 सदस्य हैं। यही संख्या नेता प्रतिपक्ष का पद बनाए रखने के लिए जरूरी न्यूनतम सीमा है। ऐसे में पार्टी के लिए अपनी मौजूदा संख्या को बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा। सपा ने चुनाव में अपने मौजूदा सदस्यों के साथ कुछ नए चेहरों को भी मैदान में उतारा है।

वहीं भाजपा के नेतृत्व वाले NDA की विधान परिषद में मजबूत स्थिति है। NDA के पास फिलहाल बड़ी संख्या में सदस्य हैं, जिसमें अकेले भाजपा के 79 सदस्य शामिल हैं। इसके अलावा सहयोगी दलों के सदस्य भी विधान परिषद में मौजूद हैं। ऐसे में NDA के सामने अपनी मौजूदा पकड़ को बनाए रखने की चुनौती होगी।

विधान परिषद के ये चुनाव विधानसभा चुनावों से अलग तरीके से होते हैं और इनमें स्नातक तथा शिक्षक मतदाता मतदान करते हैं। इसलिए उम्मीदवारों का स्थानीय प्रभाव, संगठन की तैयारी और मतदाताओं के बीच पकड़ नतीजों में अहम भूमिका निभा सकती है।2

2027 के विधानसभा चुनाव से पहले होने वाला यह चुनाव उत्तर प्रदेश की राजनीति में दलों के संगठन और जनाधार की एक महत्वपूर्ण परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है। खासतौर पर सपा के लिए विधान परिषद में अपनी मौजूदा स्थिति बनाए रखना और NDA के लिए अपने दबदबे को बरकरार रखना इस चुनाव का प्रमुख राजनीतिक पहलू होगा।