“लोकगीत शब्दों से नहीं, संस्कृति की आत्मा से जन्म लेते हैं” – फोक क्वीन मालिनी अवस्थी

प्रसिद्ध लोक गायिका और पद्मश्री सम्मानित मालिनी अवस्थी ने भारतीय लोक संगीत की महत्ता पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि “लोकगीत शब्दों से नहीं, संस्कृति की आत्मा से जन्म लेते हैं।” उनका यह कथन भारतीय लोक परंपराओं की गहराई और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है। उनके इस बयान को लोक संगीत प्रेमियों और सांस्कृतिक जगत में काफी सराहना मिल रही है।


मालिनी अवस्थी का मानना है कि लोकगीत किसी एक व्यक्ति की रचना नहीं होते, बल्कि वे समाज की सामूहिक चेतना, परंपराओं और जीवन मूल्यों का जीवंत स्वरूप हैं। पीढ़ी-दर-पीढ़ी चले आ रहे ये गीत लोगों के सुख-दुख, त्योहारों, खेती-बाड़ी, विवाह और सामाजिक जीवन से गहराई से जुड़े होते हैं। यही कारण है कि हर क्षेत्र के लोकगीत अपनी अलग पहचान और सांस्कृतिक रंग लिए हुए होते हैं।


उन्होंने कहा कि भारत की विविधता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है। देश के अलग-अलग राज्यों की भाषाएं, बोलियां और लोक परंपराएं भारतीय संस्कृति को समृद्ध बनाती हैं। लोकगीत इस विविधता को सहेजने का सबसे प्रभावी माध्यम हैं। इनमें केवल संगीत ही नहीं, बल्कि इतिहास, लोककथाएं, सामाजिक मूल्य और जीवन दर्शन भी समाहित होता है।


मालिनी अवस्थी ने युवाओं से लोक संगीत को अपनाने और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने की अपील की। उनका कहना है कि आधुनिक संगीत के दौर में भी लोकगीतों की प्रासंगिकता कम नहीं हुई है। डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया ने लोक कलाकारों को वैश्विक मंच दिया है, जिससे भारतीय लोक संगीत को दुनिया भर में नई पहचान मिल रही है।


उन्होंने यह भी कहा कि लोक संगीत हमारी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का माध्यम है। यदि हम अपनी लोक परंपराओं को भूल जाएंगे, तो अपनी सांस्कृतिक पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भी खो देंगे। इसलिए लोकगीतों का संरक्षण और संवर्धन समय की आवश्यकता है।


मालिनी अवस्थी लंबे समय से अवधी, भोजपुरी, बुंदेली और अन्य भारतीय लोक शैलियों को देश-विदेश में लोकप्रिय बनाने का कार्य कर रही हैं। उनके गीतों ने भारतीय लोक संगीत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।


मालिनी अवस्थी का यह संदेश हमें याद दिलाता है कि लोकगीत केवल शब्दों और धुनों का मेल नहीं हैं, बल्कि वे हमारी संस्कृति, परंपराओं और सामूहिक स्मृतियों की अमूल्य धरोहर हैं। इन्हें संजोकर रखना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।