मेजर ऋषभ सिंह संब्याल को मिलेगी पेंशन? जानिए सेना में नौकरी के नियम

राष्ट्रपति के पूर्व ADC (Aide-de-Camp) मेजर ऋषभ सिंह संब्याल के करीब 12 साल की सैन्य सेवा के बाद सेना से अलग होने के बाद उनकी पेंशन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मेजर संब्याल ने राष्ट्रपति के ADC के तौर पर करीब तीन साल तक जिम्मेदारी निभाई थी। हालांकि, सेना में किसी अधिकारी को पेंशन मिलने का फैसला सिर्फ उसकी पोस्ट या जिम्मेदारी के आधार पर नहीं होता, बल्कि उसकी कुल क्वालिफाइंग सर्विस और कमीशन की शर्तों समेत कई नियमों पर निर्भर करता है।

भारतीय सेना में सामान्य तौर पर अधिकारियों को सर्विस पेंशन के लिए न्यूनतम 20 साल की क्वालिफाइंग सर्विस पूरी करनी होती है। इसका मतलब यह है कि अगर किसी अधिकारी की कुल मान्य सैन्य सेवा 20 साल से कम है, तो सामान्य नियम के तहत उसे नियमित सर्विस पेंशन का लाभ नहीं मिलता। हालांकि, कुछ विशेष परिस्थितियों और सेवा की अलग-अलग श्रेणियों में नियम अलग हो सकते हैं। इसलिए केवल करीब 12 साल की सेवा के आधार पर यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि मेजर संब्याल को पेंशन मिलेगी या नहीं।

यहां यह समझना भी जरूरी है कि राष्ट्रपति के ADC के तौर पर सेवा करना अपने आप में अलग पेंशन का अधिकार नहीं देता। पेंशन का निर्धारण अधिकारी की सेवा अवधि, कमीशन के प्रकार, सेना से रिहाई या रिटायरमेंट के आधार और उस पर लागू पेंशन नियमों के अनुसार होता है। ऐसे में मेजर ऋषभ सिंह संब्याल के मामले में अंतिम स्थिति उनके आधिकारिक सर्विस रिकॉर्ड और लागू नियमों के आधार पर ही स्पष्ट होगी।

कुल मिलाकर, करीब 12 साल की सेवा होने पर सामान्य 20 साल की सर्विस-पेंशन शर्त पूरी नहीं होती। लेकिन अगर उनके मामले में कोई विशेष प्रावधान लागू होता है, तो स्थिति अलग हो सकती है। इसलिए उनकी पेंशन को लेकर अंतिम निष्कर्ष उनके सेवा रिकॉर्ड और संबंधित सैन्य पेंशन नियमों की जांच के बाद ही निकाला जा सकता है।