फिल्म ‘हनुमान अंश’ इन दिनों बॉक्स ऑफिस के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी चर्चा में है। अब एक वायरल वीडियो ने फिल्म को लेकर अलग तरह की चर्चा छेड़ दी है। वीडियो में एक मुस्लिम शख्स सिनेमाघर के अंदर बिना चप्पल के बैठकर ‘हनुमान अंश’ देखते नजर आ रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स इसे धार्मिक सम्मान और आपसी सद्भाव से जोड़कर देख रहे हैं।
वायरल क्लिप में सफेद कुर्ता-पायजामा और टोपी पहने एक शख्स थिएटर की सीट पर बैठे दिखाई देते हैं। उनके पैरों में चप्पल नहीं है और वह स्क्रीन पर चल रही फिल्म को बेहद ध्यान से देख रहे हैं। वीडियो कब और किस सिनेमाघर में रिकॉर्ड किया गया, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। साथ ही, वीडियो में नजर आ रहे व्यक्ति की पहचान की भी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर होते ही लोगों ने अपनी प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दीं। एक यूजर ने इसे “India without politics” यानी “बिना राजनीति का भारत” बताया। दूसरे यूजर्स ने शख्स के चप्पल उतारकर फिल्म देखने को सम्मान और सद्भाव की मिसाल बताया। कुछ पोस्ट में उन्हें ‘रहीम अंकल’ भी कहा गया, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों में उनकी पहचान की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
‘हनुमान अंश’ संत नीम करोली बाबा के जीवन और उनकी आध्यात्मिक यात्रा से प्रेरित फिल्म है। नीम करोली बाबा भगवान हनुमान के भक्त माने जाते हैं और उनकी शिक्षाओं में सेवा, प्रेम और मानवता पर जोर दिया गया था। फिल्म में इसी आध्यात्मिक विरासत को पर्दे पर दिखाने की कोशिश की गई है।
यह वायरल वीडियो ऐसे समय में सामने आया है जब ‘हनुमान अंश’ सिनेमाघरों में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन कर रही है। 7 अगस्त 2026 को रिलीज हुई इस फिल्म ने शुरुआती दिनों में धीमी शुरुआत की थी, लेकिन बाद के हफ्तों में इसकी कमाई में तेज उछाल देखने को मिला। रिपोर्टों के मुताबिक फिल्म 27 दिनों में भारत में करीब 61 करोड़ रुपये की नेट कमाई कर चुकी थी।
फिल्म की लोकप्रियता के बीच सोशल मीडिया पर वायरल हुआ यह दृश्य अब लोगों के लिए फिल्म से आगे बढ़कर चर्चा का विषय बन गया है। कई यूजर्स इसे इस बात के उदाहरण के तौर पर देख रहे हैं कि किसी दूसरे धर्म से जुड़ी कहानी या आध्यात्मिक व्यक्तित्व के प्रति सम्मान दिखाना धार्मिक सीमाओं से परे भी हो सकता है। हालांकि, वीडियो में दिख रहे व्यक्ति ने खुद इस gesture के पीछे क्या वजह बताई है, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए सोशल मीडिया की व्याख्याओं को उनकी व्यक्तिगत मंशा के रूप में निश्चित तौर पर पेश करना उचित नहीं होगा।





