भारत और यूरोपीय संघ के बीच Free Trade Agreement (FTA) की बातचीत जनवरी 2026 में पूरी हो चुकी है। सितंबर 2026 में यूरोपीय आयोग ने समझौते पर हस्ताक्षर और उसे अंतिम रूप देने के लिए EU Council से मंजूरी मांगी है। इसके बाद यूरोपीय संसद की सहमति और भारत की घरेलू प्रक्रियाएं पूरी होना जरूरी है।इस समझौते से भारतीय एक्सपोर्टर्स को यूरोपीय बाजार में टैरिफ कम होने का फायदा मिल सकता है। भारत के वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, EU करीब 70.4% टैरिफ लाइनों पर तुरंत शुल्क खत्म करने और लगभग 90.7% भारतीय निर्यात मूल्य को शुरुआती चरण में कवर करने पर सहमत हुआ है। आगे चलकर लगभग 97% टैरिफ लाइनों पर रियायतों का कवरेज होने की उम्मीद है।

इससे टेक्सटाइल, कपड़े, फुटवियर, केमिकल, फार्मास्यूटिकल और समुद्री उत्पादों जैसे क्षेत्रों को यूरोपीय बाजार में बेहतर प्रतिस्पर्धा का अवसर मिल सकता है। सरकार के अनुसार, भारत के EU को माल निर्यात का मूल्य 2024-25 में करीब 75.85 अरब डॉलर था।हालांकि, समझौते का फायदा अपने आप नहीं मिलेगा। भारतीय कंपनियों को EU के गुणवत्ता मानकों, Rules of Origin, पर्यावरणीय नियमों और अन्य compliance requirements को पूरा करना होगा। खासकर स्टील जैसे क्षेत्रों में अतिरिक्त बाजार पहुंच के बावजूद carbon-related costs और quota जैसी शर्तें बनी हुई हैं।कुल मिलाकर, भारत-EU FTA भारतीय निर्यातकों के लिए यूरोपीय बाजार तक पहुंच बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण अवसर बन सकता है। लेकिन इसका वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि समझौता कब लागू होता है और भारतीय कंपनियां लागत, गुणवत्ता और यूरोपीय नियमों से जुड़ी आवश्यकताओं के अनुसार कितनी अच्छी तरह तैयारी करती हैं।





