पटना: बिहार सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन को बढ़ावा देने और पशुपालकों तक समय पर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए लगभग 7,000 ‘पशु सखी’ तैयार की हैं। ये महिलाएं स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जुड़ी हैं और विशेष प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद गांवों में पशुओं की प्राथमिक देखभाल, स्वास्थ्य संबंधी सलाह और सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराएंगी। इस पहल का उद्देश्य पशुपालकों को उनके गांव में ही बुनियादी पशु चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना और ग्रामीण महिलाओं को रोजगार से जोड़ना है।
पशु सखियों को पशुओं के प्राथमिक उपचार, टीकाकरण में सहयोग, कृमिनाशक दवा (डी-वॉर्मिंग), पशुओं के पोषण, स्वच्छता और बेहतर पशुपालन तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया है। वे पशुओं में बीमारी के शुरुआती लक्षण पहचानकर जरूरत पड़ने पर पशु चिकित्सकों से संपर्क कराने का भी काम करेंगी। इससे गांवों में पशुओं की मृत्यु दर कम होने और उनकी उत्पादकता बढ़ने की उम्मीद है।
इसके अलावा, पशु सखी किसानों को पशुओं के लिए संतुलित आहार, उचित आवास, स्वच्छ पेयजल और नस्ल सुधार से जुड़ी जानकारी भी देंगी। वे पशुपालकों को सरकारी योजनाओं, टीकाकरण अभियान और अन्य सुविधाओं से जोड़ने में सेतु की भूमिका निभाएंगी, जिससे योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके।
सरकार का मानना है कि इस पहल से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। खासकर बकरी, गाय और भैंस पालन करने वाले छोटे किसानों को समय पर सलाह और सेवाएं मिल सकेंगी। पशुओं के स्वस्थ रहने से दूध उत्पादन बढ़ेगा, पशुपालकों की आय में सुधार होगा और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
यह पहल महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद पशु सखियां सेवा शुल्क के माध्यम से आय अर्जित कर सकेंगी। इससे वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ अपने गांव में एक प्रशिक्षित सामुदायिक संसाधन व्यक्ति के रूप में भी पहचान बनाएंगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि गांव स्तर पर प्रशिक्षित पशु सखियों की उपलब्धता से पशुपालकों को छोटी-छोटी समस्याओं के लिए दूर स्थित पशु अस्पतालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। समय पर उपचार और सही सलाह मिलने से पशुपालन व्यवसाय अधिक लाभकारी बनेगा। बिहार सरकार को उम्मीद है कि यह पहल पशुपालन क्षेत्र को नई गति देने के साथ-साथ ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता का नया माध्यम भी बनेगी।




