प्राथमिक स्तर पर शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने और शिक्षकों के शिक्षण कौशल को मजबूत करने के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रहलाद जोशी ने छह महीने का सर्टिफिकेट ब्रिज कोर्स लॉन्च किया है। यह कोर्स खास तौर पर कार्यरत प्राथमिक शिक्षकों के लिए तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य शिक्षकों को कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों की उम्र, सीखने की क्षमता और जरूरतों के अनुसार प्रभावी तरीके से पढ़ाने के लिए जरूरी प्रशिक्षण देना है।
यह ब्रिज कोर्स नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (NIOS) के माध्यम से संचालित किया जाएगा और इसे नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (NCTE) के तय फ्रेमवर्क के अनुसार तैयार किया गया है। कोर्स में बच्चों पर केंद्रित शिक्षा, समावेशी शिक्षण और कक्षा में बेहतर शैक्षणिक माहौल बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। शिक्षकों को अलग-अलग क्षमता और जरूरत वाले बच्चों को साथ लेकर पढ़ाने के तरीकों की भी जानकारी दी जाएगी।
छह महीने के इस कार्यक्रम में छह थ्योरी कोर्स के साथ स्कूल आधारित प्रैक्टिकल प्रशिक्षण भी शामिल है। शिक्षकों को कम से कम 10 दिन की ऑनलाइन संपर्क कक्षाओं में हिस्सा लेना होगा, जबकि 20 दिन का स्कूल आधारित अनुभव भी जरूरी होगा। इस दौरान प्रैक्टिस टीचिंग, रिफ्लेक्टिव जर्नल और पोर्टफोलियो जैसी गतिविधियां कराई जाएंगी, जिससे शिक्षक प्रशिक्षण में सीखी गई चीजों को वास्तविक कक्षा में लागू कर सकें।
यह कोर्स ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग यानी ODL माध्यम से संचालित होगा। शिक्षकों को डिजिटल स्टडी मटेरियल, वीडियो ट्यूटोरियल और ई-लर्निंग संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। पढ़ाई का माध्यम हिंदी और अंग्रेजी रहेगा, जबकि परीक्षा में संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल 22 भाषाओं में उत्तर लिखने की सुविधा होगी।
यह पहल 8 अप्रैल 2024 को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद तैयार की गई है। इसके तहत पात्र कार्यरत प्राथमिक शिक्षकों के लिए ब्रिज कोर्स का प्रावधान किया गया है, जिनकी नियुक्ति प्राथमिक स्तर पर हुई थी, लेकिन उनके पास D.El.Ed. की योग्यता नहीं थी। निर्धारित श्रेणी में 28 जून 2018 से 11 अगस्त 2023 के बीच नियुक्त B.Ed. योग्य प्राथमिक शिक्षक शामिल हैं।
सरकार का लक्ष्य इस कार्यक्रम के जरिए प्राथमिक शिक्षकों की पेशेवर क्षमता को मजबूत करना और शुरुआती कक्षाओं में बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराना है। प्रशिक्षण के जरिए शिक्षकों को न केवल विषय पढ़ाने के तरीके बताए जाएंगे, बल्कि बच्चों की सीखने की जरूरतों को समझकर उनके विकास में बेहतर भूमिका निभाने के लिए भी तैयार किया जाएगा।





