प्रयागराज: उत्तर प्रदेश पुलिस में सेवाकाल के दौरान मृत कर्मचारियों के आश्रितों की भर्ती को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने पुलिस विभाग में मृतक आश्रितों की भर्ती के लिए तय 5 प्रतिशत की अधिकतम सीमा को सही माना है। साथ ही, अगर उपलब्ध पदों की तुलना में आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों की संख्या ज्यादा हो जाती है, तो चयन के लिए ऑब्जेक्टिव टाइप टेस्ट कराने की व्यवस्था को भी अदालत ने वैध ठहराया है। इस फैसले से पुलिस विभाग में अनुकंपा नियुक्ति की मौजूदा प्रक्रिया पर स्थिति स्पष्ट हो गई है।
मामले में अजय सिंह यादव समेत 25 अन्य याचिकाकर्ताओं ने भर्ती से जुड़े इन प्रावधानों को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि सेवाकाल में कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसके परिवार को आर्थिक संकट से राहत देने के लिए अनुकंपा नियुक्ति का प्रावधान किया गया है। ऐसे में 5 प्रतिशत की सीमा और टेस्ट की शर्त से इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रभावित होता है। याचिकाकर्ताओं ने यह भी दलील दी कि ये प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 के अनुरूप नहीं हैं।
हाईकोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि सरकारी पद सीमित होते हैं और अनुकंपा नियुक्ति के साथ सामान्य भर्ती के जरिए नौकरी पाने वाले अभ्यर्थियों के अवसरों का संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है। कोर्ट ने अपने पुराने ‘अंकुर गौतम बनाम उत्तर प्रदेश राज्य’ मामले के फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें 5 प्रतिशत की सीमा को उचित माना गया था। अदालत के अनुसार, ज्यादा आवेदन आने की स्थिति में ऑब्जेक्टिव टेस्ट के जरिए चयन की प्रक्रिया भी एक तय और समान आधार उपलब्ध कराती है।
इस मामले में कुल नौ याचिकाएं दाखिल की गई थीं, जिनमें अजय सिंह यादव समेत 25 आश्रित शामिल थे। हाईकोर्ट ने सभी याचिकाओं को खारिज करते हुए पुलिस विभाग में मृतक आश्रितों की भर्ती के लिए लागू 5 प्रतिशत सीमा और जरूरत पड़ने पर ऑब्जेक्टिव टेस्ट की व्यवस्था को बरकरार रखा है। यानी अब उपलब्ध पदों से ज्यादा आवेदन होने पर तय नियमों के अनुसार टेस्ट के जरिए अभ्यर्थियों का चयन किया जा सकेगा।





