पंडवानी की महान गायिका तीजन बाई का निधन, लोककला जगत ने दी श्रद्धांजलि

पंडवानी गायन को देश और दुनिया में नई पहचान दिलाने वाली प्रसिद्ध लोकगायिका तीजन बाई का रविवार को लंबी बीमारी के बाद रायपुर के एम्स में निधन हो गया। उनके निधन से भारतीय लोककला जगत को बड़ी क्षति हुई है। वह लगभग 70 वर्ष की थीं और पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रही थीं।

तीजन बाई ने अपनी अनूठी गायन शैली और प्रभावशाली प्रस्तुति के दम पर छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोककला पंडवानी को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया। महाभारत की कथाओं को जीवंत अंदाज में प्रस्तुत करने की उनकी कला ने उन्हें देश की सबसे प्रतिष्ठित लोक कलाकारों में शामिल किया।

संघर्षों से भरे जीवन के बावजूद उन्होंने सामाजिक रूढ़ियों को चुनौती देते हुए पंडवानी की कापालिक शैली को नई पहचान दिलाई। उनके कला क्षेत्र में असाधारण योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से सम्मानित किया गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई नेताओं, कलाकारों और सांस्कृतिक हस्तियों ने उनके निधन पर संवेदना व्यक्त की और भारतीय लोकसंस्कृति के प्रति उनके योगदान को याद किया।

तीजन बाई का योगदान भारतीय लोककला के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा। उनकी कला आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी।