तमिलनाडु के थूथुकुडी जिले का कुलासेकरपट्टिनम इलाका अब एक बड़े बदलाव का गवाह बनने जा रहा है। यह क्षेत्र पारंपरिक नमक उत्पादन के लिए जाना जाता है, लेकिन आने वाले समय में इसकी पहचान भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम से भी जुड़ जाएगी। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) यहां देश का दूसरा प्रमुख स्पेसपोर्ट विकसित कर रहा है। इस लॉन्च सेंटर का मुख्य इस्तेमाल छोटे रॉकेट और सैटेलाइट की लॉन्चिंग के लिए किया जाएगा।
कुलासेकरपट्टिनम में बनने वाला यह लॉन्च कॉम्प्लेक्स खास तौर पर Small Satellite Launch Vehicle यानी SSLV के लिए तैयार किया जा रहा है। SSLV को छोटे उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजने के लिए विकसित किया गया है। इसके जरिए करीब 500 किलोग्राम तक के उपग्रहों को Sun-Synchronous Polar Orbit में भेजा जा सकता है। इस लॉन्च सेंटर की एक खास बात यह भी है कि भविष्य में भारतीय निजी अंतरिक्ष कंपनियां भी यहां से अपने रॉकेट लॉन्च कर सकेंगी।

कुलासेकरपट्टिनम को लॉन्च साइट के तौर पर चुनने के पीछे इसकी भौगोलिक स्थिति महत्वपूर्ण है। यह समुद्र के किनारे स्थित है और भूमध्य रेखा के अपेक्षाकृत करीब है। यहां से रॉकेट को दक्षिण दिशा में समुद्र की ओर भेजने के लिए अनुकूल रास्ता मिलता है। इससे लॉन्चिंग के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर तरीके से संभालने और रॉकेट की क्षमता का प्रभावी इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी।
इस प्रोजेक्ट की नींव 28 फरवरी 2024 को रखी गई थी। इसके बाद मार्च 2025 में प्रमुख निर्माण कार्य शुरू हुआ। लॉन्च कॉम्प्लेक्स में रॉकेट की तैयारी और उसे लॉन्च के लिए तैयार करने वाली इमारत, लॉन्च पैड, रेल ट्रैक सिस्टम, रेंज सिस्टम, टेलीमेट्री और टेली-कमांड सिस्टम के साथ सुरक्षा और फायर-फाइटिंग जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
सरकार के अनुसार, कुलासेकरपट्टिनम का यह नया लॉन्च सेंटर वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान शुरू किए जाने की योजना है। इसके तैयार होने के बाद भारत की छोटे उपग्रहों को लॉन्च करने की क्षमता बढ़ेगी। साथ ही, देश के तेजी से बढ़ते निजी स्पेस सेक्टर को भी एक नई लॉन्च सुविधा मिलेगी। इससे भारत के अंतरिक्ष उद्योग में नई कंपनियों और निवेश के लिए भी अवसर बढ़ने की उम्मीद है।
कुलासेकरपट्टिनम की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि जिस इलाके की पहचान लंबे समय से नमक की पारंपरिक खेती से रही है, वहीं अब आधुनिक रॉकेट लॉन्चिंग की सुविधाएं तैयार हो रही हैं। नमक की क्यारियों से लेकर अंतरिक्ष तक का यह सफर तमिलनाडु के इस तटीय क्षेत्र को भारत के बदलते स्पेस सेक्टर का एक अहम हिस्सा बना सकता है।





