
दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के छात्र बहुल इलाके सत्य निकेतन में एक 40-50 साल पुरानी पांच मंजिला इमारत के अचानक जमींदोज हो जाने से बड़ा हादसा हो गया। दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास स्थित यह इमारत छात्रों के लिए पेइंग गेस्ट (PG) के रूप में इस्तेमाल की जा रही थी। शुरुआती जांच के मुताबिक, इमारत के बेसमेंट में अवैध रूप से खुदाई और नवीनीकरण का काम चल रहा था, जिसके कारण मुख्य पिलर खिसक गया और पूरी इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई। हादसे में 7 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि एनडीआरएफ, दमकल विभाग और दिल्ली पुलिस की संयुक्त टीमों द्वारा चलाए गए रातभर के रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान 11 लोगों को मलबे से सुरक्षित निकालकर एम्स ट्रॉमा सेंटर और सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया।
घटनास्थल का दौरा करने के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने साफ किया कि इस भीषण लापरवाही के लिए जिम्मेदार मकान मालिक हरिराम बंसल और प्रशासनिक अधिकारियों में से किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। मकान मालिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उसके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया है, वहीं लापरवाही के आरोप में एमसीडी के पांच अधिकारियों (डिप्टी कमिश्नर, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर, असिस्टेंट इंजीनियर और जूनियर इंजीनियर) को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही, राजधानी में पांचवीं मंजिल वाली और अवैध रूप से संचालित इमारतों को सील करने तथा सभी पीजी हॉस्टलों के स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट कराने के कड़े निर्देश दिए गए हैं





