दिल्ली के सत्य निकेतन में रविवार को ढही बहुमंजिला PG बिल्डिंग के मलबे के नीचे फंसे एक छात्र का 11 सेकंड का SOS वीडियो सामने आया है। वीडियो में छात्र मलबे के बीच फंसा दिखाई दे रहा है और मदद की गुहार लगाता नजर आ रहा है। इस वीडियो के सामने आने के बाद बचावकर्मियों और स्थानीय लोगों ने छात्र की लोकेशन का पता लगाकर उसे बाहर निकालने की कोशिश तेज कर दी।वीडियो में छात्र का चेहरा धूल और मलबे से ढका दिखाई देता है। उसके चेहरे पर चोट के निशान भी नजर आते हैं, लेकिन वह उस समय होश में था और कैमरे को घुमाकर अपने आसपास का मलबा दिखा रहा था। रिपोर्ट के मुताबिक, छात्र की पहचान आदित्य कुमार के रूप में हुई, जो दिल्ली विश्वविद्यालय के आत्मा राम सनातन धर्म कॉलेज का छात्र है।
यह वीडियो छात्रों और लोगों के बीच तेजी से साझा हुआ। एक छात्र संगठन से जुड़े लोगों को वीडियो मिलने के बाद वे घटनास्थल पर पहुंचे और बचाव टीमों को छात्र की संभावित स्थिति के बारे में जानकारी दी। मौके पर मौजूद लोगों ने मलबे के बीच उसकी तलाश शुरू कर दी। इस दौरान यह संदेश भी तेजी से फैल रहा था कि युवक जिंदा है और उसे जल्द से जल्द बाहर निकालने की जरूरत है।
दिल्ली फायर सर्विस के सूत्रों के मुताबिक, देर रात आदित्य को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया और उसकी हालत गंभीर नहीं बताई गई। उसके वीडियो ने यह उम्मीद भी जगाई कि मलबे में फंसे दूसरे लोगों को भी समय रहते बचाया जा सकता है।
सत्य निकेतन की यह इमारत छात्रों के लिए PG के तौर पर इस्तेमाल होती थी और दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास स्थित थी। हादसे के बाद कई छात्रों ने बताया कि इमारत की दीवारों में पहले से दरारें थीं और बेसमेंट में पानी भरने की समस्या भी रहती थी। इमारत में निर्माण या मरम्मत का काम चलने की बात भी सामने आई है। हालांकि, बिल्डिंग गिरने की वास्तविक वजह की आधिकारिक जांच अभी जारी है।
हादसे के बाद राहत और बचाव अभियान में दिल्ली फायर सर्विस, NDRF, दिल्ली पुलिस, MCD, सिविल डिफेंस और अन्य एजेंसियां जुटी रहीं। कई फंसे लोगों ने फोन और वीडियो कॉल के जरिए बाहर मौजूद लोगों से संपर्क किया था, जिससे बचाव दलों को मलबे के भीतर संभावित जीवित लोगों का पता लगाने में मदद मिली।
इस घटना ने दिल्ली में छात्रों के लिए चल रहे PG और हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन अब यह जांच कर रहा है कि इमारत की संरचनात्मक स्थिति कैसी थी, वहां किसी तरह का अनधिकृत निर्माण या बदलाव तो नहीं किया गया था और सुरक्षा नियमों का पालन हुआ था या नहीं।





