दिल्ली में स्टूडेंट PG की इमारत ढही, 6 की मौत; मलबे में दर्जनों के फंसे होने की आशंका, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में छात्रों के लिए इस्तेमाल की जा रही एक बहुमंजिला PG इमारत के ढहने से बड़ा हादसा हो गया। रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे हुई इस दुर्घटना में अब तक कम से कम 6 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई लोग घायल हैं। मलबे के नीचे अभी भी दर्जनों छात्रों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। बचाव दल लगातार मलबा हटाकर लोगों को बाहर निकालने की कोशिश कर रहे हैं।

यह इमारत दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास स्थित सत्य निकेतन में थी और इसे लड़कों के लिए PG के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था। पुलिस के शुरुआती आकलन के मुताबिक इमारत करीब 40 से 50 साल पुरानी थी। इसमें बेसमेंट के अलावा पांच ऊपरी मंजिलें थीं। हादसे के समय इमारत में मरम्मत या निर्माण से जुड़ा काम चल रहा था। हालांकि, यह काम ही इमारत गिरने की वजह बना या नहीं, इसकी अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने भी बचाव अभियान में हिस्सा लिया और अपने हाथों तथा उपलब्ध उपकरणों की मदद से मलबा हटाने की कोशिश की। दिल्ली पुलिस, दिल्ली फायर सर्विस, NDRF, DDMA और अन्य एजेंसियों की टीमें मौके पर पहुंचीं। अधिकारियों के अनुसार कई लोगों को मलबे से सुरक्षित निकाला गया है, जबकि कुछ घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

हादसे की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मलबे के नीचे फंसे छात्रों की ओर से फोन कॉल भी आए। एक छात्र ने कथित तौर पर मलबे के अंदर से 11 सेकंड का SOS वीडियो कॉल किया, जिसमें वह धूल और मलबे के बीच फंसा नजर आया। वीडियो में छात्र अपने आसपास की स्थिति दिखाते हुए मदद की गुहार लगाता दिखाई दिया। इस वीडियो के सामने आने के बाद बचावकर्मियों पर जल्द से जल्द फंसे लोगों तक पहुंचने का दबाव और बढ़ गया।

प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों के मुताबिक इमारत में करीब 40 से 50 छात्र मौजूद हो सकते थे, हालांकि मलबे में फंसे लोगों की वास्तविक संख्या अभी स्पष्ट नहीं है। दिल्ली पुलिस ने भी कहा है कि फिलहाल यह पता लगाना बाकी है कि हादसे के समय इमारत में कितने लोग मौजूद थे। यही वजह है कि बचाव अभियान को लगातार जारी रखा गया है।इमारत की संरचना को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। एक वरिष्ठ MCD अधिकारी के अनुसार, यह करीब 55 वर्ग गज के प्लॉट पर बनी G+4 संरचना थी, जबकि मूल अनुमति केवल G+1 भवन के लिए होने की बात सामने आई है। हादसे के बाद MCD ने अवैध रूप से बने अतिरिक्त निर्माण को लेकर कार्रवाई शुरू की है। पास की एक अन्य इमारत को भी एहतियात के तौर पर खाली कराया गया है।दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटनास्थल का जायजा लिया और मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। सरकार की ओर से इमारत के मालिक के खिलाफ FIR दर्ज कराने की भी जानकारी दी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि इस हादसे के लिए जो भी जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है। बचाव दल भारी मलबे को सावधानी से हटाते हुए संभावित जीवित लोगों की तलाश कर रहे हैं। अधिकारियों ने आसपास के लोगों और तमाशबीनों से घटनास्थल से दूर रहने की अपील की है, ताकि एंबुलेंस और बचाव वाहनों की आवाजाही में कोई बाधा न आए। हादसे की वास्तविक वजह और इमारत में नियमों के उल्लंघन की पूरी तस्वीर जांच के बाद ही सामने आएगी।