डिस्काउंट नहीं, इस वजह से बढ़ा भारत का रूसी तेल आयात

भारत में रूसी कच्चे तेल का आयात बढ़ने की वजह सिर्फ सस्ता तेल या बड़ा डिस्काउंट नहीं है। हालिया आर्थिक विश्लेषण के मुताबिक, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक तेल सप्लाई को लेकर बनी अनिश्चितता ने भारत को रूस से ज्यादा कच्चा तेल खरीदने के लिए प्रेरित किया। ऐसे समय में रूस भारत के लिए एक महत्वपूर्ण और भरोसेमंद तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।

रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2023 से 2026 के दौरान भारत ने रूस से औसतन करीब 4.6 करोड़ बैरल कच्चा तेल हर महीने खरीदा। वहीं, अमेरिका-ईरान संघर्ष और पश्चिम एशिया में सप्लाई को लेकर बढ़ी चिंता के बीच यह औसत बढ़कर करीब 6 करोड़ बैरल प्रति माह तक पहुंच गया। खास बात यह है कि इस दौरान रूसी तेल पर मिलने वाला डिस्काउंट पहले की तरह बहुत बड़ा नहीं था। आम तौर पर यह अंतर करीब 3 से 5 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहा।

पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही को लेकर भी चिंता बढ़ी। यह मार्ग दुनिया की ऊर्जा सप्लाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे माहौल में भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखने के लिए अलग-अलग स्रोतों से तेल की खरीद जारी रखी। रूसी तेल की उपलब्धता ने इस रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

हालांकि, रूसी तेल पर भारत की निर्भरता हर महीने एक जैसी नहीं रही। अगस्त 2026 में भारत का रूसी तेल आयात करीब 16.5 फीसदी घटकर लगभग 21 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया। इसके पीछे रूस से सप्लाई में कमी, चीन की ओर से बढ़ी खरीद और मध्य-पूर्व से वैकल्पिक तेल की उपलब्धता जैसे कई कारण रहे। इससे पता चलता है कि भारत जरूरत और वैश्विक बाजार की स्थिति के अनुसार अपने तेल आयात का संतुलन बदलता रहता है।

कुल मिलाकर, भारत का रूसी तेल आयात केवल डिस्काउंट की वजह से बढ़ा है, ऐसा कहना पूरी तस्वीर नहीं बताता। तेल की उपलब्धता, वैश्विक कीमतें, पश्चिम एशिया का तनाव, सप्लाई रूट की स्थिति और भारत की ऊर्जा सुरक्षा जैसे कई factors इसके पीछे काम कर रहे हैं। आने वाले समय में भी वैश्विक तेल बाजार में होने वाले बदलाव भारत की रूसी तेल खरीद की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।