ब्रिटेन की एकता को लेकर एक बड़ी राजनीतिक खबर सामने आई है। स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड की राष्ट्रवादी पार्टियों ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते में इन क्षेत्रों के लोगों के अपने राजनीतिक भविष्य का फैसला खुद करने के अधिकार का समर्थन किया गया है। यानी अगर भविष्य में इन क्षेत्रों की जनता ब्रिटेन से अलग होने या अपनी संवैधानिक स्थिति बदलने की मांग करती है, तो उन्हें अपनी बात रखने और लोकतांत्रिक तरीके से फैसला लेने का अधिकार मिलना चाहिए।
हालांकि, इस समझौते का मतलब यह नहीं है कि ब्रिटेन तुरंत टूटने जा रहा है।इस समझौते में स्कॉटलैंड की स्कॉटिश नेशनल पार्टी (SNP), वेल्स की Plaid Cymru और उत्तरी आयरलैंड की Sinn Féin शामिल हैं। तीनों पार्टियां अपने-अपने क्षेत्रों को ज्यादा अधिकार और राजनीतिक स्वतंत्रता देने की मांग करती रही हैं। स्कॉटलैंड में 2014 में आजादी को लेकर जनमत संग्रह हो चुका है। उस समय करीब 55 प्रतिशत लोगों ने ब्रिटेन के साथ रहने के पक्ष में वोट दिया था। अब SNP दोबारा स्वतंत्रता पर जनमत संग्रह कराने की मांग कर रही है। वहीं, वेल्स में भी स्वतंत्रता की मांग को लेकर राजनीतिक समर्थन बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

उत्तरी आयरलैंड का मामला थोड़ा अलग है। यहां लंबे समय से ब्रिटेन के साथ रहने और आयरलैंड के साथ जुड़ने को लेकर राजनीतिक मतभेद रहे हैं। 1998 के Good Friday Agreement के तहत अगर हालात ऐसे बनते हैं कि आयरलैंड के साथ एकीकरण के पक्ष में बहुमत की संभावना दिखाई दे, तो जनमत संग्रह कराया जा सकता है। Sinn Féin इसी मुद्दे को आगे बढ़ा रही है। ऐसे में स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड की पार्टियों का एक साथ आना ब्रिटेन की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि, फिलहाल ब्रिटेन के टूटने की कोई पक्की घोषणा नहीं हुई है। इस समझौते को ज्यादा से ज्यादा राजनीतिक दबाव और भविष्य की स्वतंत्रता की मांग को मजबूत करने वाला कदम माना जा रहा है। अगर आने वाले वर्षों में इन क्षेत्रों में ब्रिटेन से अलग होने या आयरलैंड के साथ जुड़ने के समर्थन में बढ़ोतरी होती है, तो ब्रिटेन के मौजूदा संवैधानिक ढांचे में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इसलिए आने वाले समय में यह मुद्दा ब्रिटेन की राजनीति के सबसे अहम सवालों में शामिल हो सकता है।





