जंतर-मंतर पर हुए CJP (Cockroach Janta Party) के छात्र आंदोलन के दौरान मुफ्त भोजन और पानी की व्यवस्था संभालने वाले वॉलंटियर मोहम्मद जुनैद मलिक इन दिनों चर्चा का विषय बने हुए हैं। आंदोलन के दौरान उन्होंने प्रदर्शनकारियों के लिए सामुदायिक रसोई (कम्युनिटी किचन) का संचालन किया और रोज़ाना हजारों छात्रों तक भोजन, फल, बिस्कुट और पीने का पानी पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मंच पर भाषण देने के बजाय उन्होंने पूरे आंदोलन के दौरान सेवा कार्यों पर ध्यान केंद्रित किया और लगातार भोजन वितरण की व्यवस्था संभाली।
हाल ही में जुनैद मलिक ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उनकी याचिका में आरोप लगाया गया है कि उन्हें दिल्ली पुलिस ने अवैध रूप से हिरासत में लिया, भोजन वितरण के लिए धन के स्रोत के बारे में पूछताछ की और बाद में उन्हें उत्तराखंड के पास छोड़ दिया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके परिवार के सदस्यों को भी पुलिस कार्रवाई और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। इन आरोपों ने आंदोलन से जुड़े स्वयंसेवकों के साथ व्यवहार और नागरिक स्वतंत्रताओं को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश पुलिस ने परिवार के उत्पीड़न से जुड़े आरोपों का खंडन किया है। मामले को लेकर अलग-अलग पक्षों के दावे सामने आए हैं और अब यह मामला न्यायिक प्रक्रिया के तहत विचाराधीन है। फिलहाल आरोपों पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष आना बाकी है।
मोहम्मद जुनैद मलिक का नाम पहली बार व्यापक रूप से तब सामने आया जब आंदोलन के दौरान उनकी भोजन परोसते हुए तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। कई प्रदर्शनकारियों ने उन्हें आंदोलन के उन स्वयंसेवकों में गिना जिन्होंने बिना किसी प्रचार के लगातार सेवा कार्य किया और हजारों लोगों तक भोजन एवं पानी पहुंचाने में योगदान दिया।




