कानपुर नगर निगम में फर्मों के पंजीकरण और टेंडर प्रक्रिया को लेकर चल रही जांच में कई अहम अनियमितताएं सामने आई हैं। मुख्य विकास अधिकारी (CDO) की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय जांच समिति ने नगर निगम में पंजीकृत फर्मों से जुड़े दस्तावेजों की जांच की। जांच के दौरान 15 से अधिक फर्मों के दस्तावेजों में गड़बड़ी और जरूरी कागजात की कमी पाई गई। मामले में कानपुर मंडलायुक्त ने CDO की जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी है। अब रिपोर्ट के आधार पर शासन स्तर से आगे की कार्रवाई तय की जा सकती है।
जांच के दौरान फर्मों की फाइलों में जरूरी प्रमाणपत्र, अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की स्थिति की पड़ताल की गई। सामने आया कि कुछ फर्मों की फाइलों में दस्तावेज अधूरे थे या उनका सत्यापन सही तरीके से नहीं किया गया था। इसके बावजूद कुछ मामलों में फर्मों का पंजीकरण या नवीनीकरण किए जाने की बात सामने आई है। जांच समिति ने उपलब्ध कराई गई पंजीकरण फाइलों में से कुछ फाइलों की रैंडम जांच भी की, जिसके बाद पूरी प्रक्रिया में बरती गई लापरवाही पर सवाल उठे हैं।
मामला केवल फर्मों के दस्तावेजों तक सीमित नहीं है। जांच में टेंडर प्रक्रिया, निर्माण कार्य, बिल भुगतान और वित्तीय रिकॉर्ड से जुड़े मामलों को भी देखा जा रहा है। कुछ मामलों में बिलिंग और खर्च से संबंधित अनियमितताओं की जानकारी भी जांच के दौरान सामने आई है। इसके साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि फर्मों के दस्तावेजों के सत्यापन और उन्हें काम दिए जाने की प्रक्रिया में किन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका रही।
मामले में पहले भी कार्रवाई की जा चुकी है। अनियमितताओं के सामने आने के बाद कुछ कर्मचारियों पर विभागीय कार्रवाई हुई है और संबंधित ठेकेदारों के खिलाफ भी मुकदमे दर्ज किए गए हैं। वहीं, पूरे मामले की जांच अलग-अलग स्तर पर जारी है। अब CDO की रिपोर्ट शासन को भेजे जाने के बाद इस मामले में आगे की कार्रवाई को लेकर फैसला शासन स्तर से लिया जाएगा। रिपोर्ट में सामने आई गड़बड़ियों की गंभीरता और संबंधित लोगों की भूमिका के आधार पर जिम्मेदारी तय किए जाने की संभावना है।





