
यह खबर पश्चिम एशिया में बढ़ते बेहद गंभीर और संवेदनशील सैन्य तनाव की ओर इशारा करती है, जहाँ मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अमेरिका ने ईरान के भीतर स्थित ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) के ठिकानों पर व्यापक सैन्य हमले किए हैं। इस बड़े हमले के दौरान हुए तेज और लगातार धमाकों से ईरान का तटीय शहर बंदर अब्बास और रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Wait of Hormuz) का पूरा इलाका दहल उठा। बंदर अब्बास न केवल ईरान की नौसेना और IRGC के समुद्री अभियानों का प्रमुख प्रशासनिक व सैन्य केंद्र माना जाता है, बल्कि इस क्षेत्र में किसी भी तरह की सैन्य हलचल पूरे वैश्विक व्यापार पर सीधा असर डालती है।
होर्मुज जलडमरूमध्य को दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण और व्यस्त ‘ऑयल ट्रांजिट चोकपॉइंट’ माना जाता है, जहाँ से होकर दुनिया के कुल समुद्री तेल परिवहन का एक-तिहाई हिस्सा गुजरता है। इस वजह से बंदर अब्बास और होर्मुज के आसपास सैन्य कार्रवाई की खबरों से वैश्विक ऊर्जा बाजारों में हड़कंप मच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष और आगे बढ़ता है या होर्मुज में वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बेतहाशा उछाल देखने को मिल सकता है, जिससे दुनिया भर में मुद्रास्फीति और महंगाई का दबाव बढ़ जाएगा।
इसके अलावा, इस घटनाक्रम से पूरे मध्य पूर्व में एक पूर्णकालिक और विनाशकारी युद्ध छिड़ने की आशंका भी तेज हो गई है। IRGC और अमेरिकी बलों के बीच यह सीधा टकराव इजराइल, लेबनान, यमन और खाड़ी के अन्य देशों को भी इस संघर्ष की चपेट में खींच सकता है। वैश्विक जहाजरानी मार्ग बाधित होने से आपूर्ति श्रृंखला (supply chain) पर गहरा असर पड़ेगा, जिससे व्यापारिक लागत और बीमा दरें काफी बढ़ सकती हैं। फिलहाल दुनिया भर के कूटनीतिज्ञ, रक्षा विशेषज्ञ और अंतरराष्ट्रीय संगठन इस स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि आने वाले दिनों में आधिकारिक बयानों के बाद ही इस सैन्य कार्रवाई के वास्तविक नुकसान और इसके दीर्घकालिक भू-राजनीतिक परिणामों की स्पष्ट तस्वीर सामने आ पाएगी।





