ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच शांति की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, जिसमें सात दिनों के भीतर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को दोबारा खोलने और क्षेत्र में जारी संघर्ष को खत्म करने का रास्ता सुझाया गया था। इसके जवाब में ईरान ने कहा है कि इस संकट का समाधान सैन्य दबाव से नहीं, बल्कि बातचीत और कूटनीति के जरिए ही निकलेगा।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के मुताबिक, तेहरान ने यह प्रस्ताव कतर के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया था। इसमें सैन्य दबाव कम करने, ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी हटाने और कुछ आर्थिक प्रतिबंधों में राहत देने की मांग की गई है। ईरान का कहना है कि इन शर्तों पर सहमति बनने के बाद हॉर्मुज में सामान्य समुद्री आवाजाही बहाल की जा सकती है और दोनों देशों के बीच आगे व्यापक बातचीत शुरू हो सकती है।
हालांकि, ट्रंप ने प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। वहीं, ईरान अपनी शर्तों पर कायम है और बातचीत का रास्ता खुला रखने की बात कह रहा है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने भी कहा है कि उनका देश युद्ध नहीं चाहता, लेकिन दबाव और धमकियों के बीच कोई समझौता स्वीकार नहीं करेगा। तेहरान का कहना है कि परमाणु कार्यक्रम समेत विवादित मुद्दों पर बातचीत के जरिए समाधान निकाला जा सकता है।
इस पूरे विवाद में स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज बेहद अहम है। यह दुनिया के प्रमुख तेल और गैस परिवहन मार्गों में से एक है और यहां किसी भी तरह की रुकावट का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।
समुद्री आवाजाही प्रभावित होने से तेल की कीमतों और वैश्विक व्यापार पर भी दबाव बढ़ सकता है।फिलहाल ईरान कूटनीति के जरिए रास्ता निकालने पर जोर दे रहा है, जबकि अमेरिका की ओर से ईरान पर दबाव बनाए रखने का रुख सामने आया है। ऐसे में आने वाले दिनों में मध्यस्थ देशों के जरिए होने वाली बातचीत और दोनों पक्षों के अगले कदम इस संकट की दिशा तय करने में अहम होंगे।





