ईओ विमल कुमार की हत्या में विधायक क्यों फंसे? जानिए पूरा मामला

बिहार के डेहरी नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी (EO) विमल कुमार की हत्या का मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। इस मामले में पुलिस जांच के साथ-साथ राजनीतिक विवाद भी गहरा गया है। हत्या के बाद मृतक की पत्नी द्वारा लगाए गए आरोपों के चलते एक विधायक का नाम भी चर्चा में आ गया है।


पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में ईओ के चालक को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का दावा है कि पूछताछ के दौरान चालक ने हत्या की बात स्वीकार की। जांच एजेंसियों के मुताबिक, चालक ने पहले अज्ञात हमलावरों द्वारा हमला किए जाने की कहानी बताई थी, लेकिन उसके बयान में विरोधाभास मिलने के बाद पूछताछ आगे बढ़ाई गई।


इसी बीच, मृतक की पत्नी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि स्थानीय विधायक राजीव रंजन सिंह उर्फ सोनू सिंह उनके पति पर कथित रूप से आर्थिक दबाव डालते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि विधायक ने उनसे 50 लाख रुपये और बाद में 25 लाख रुपये की मांग की थी। पत्नी का यह भी दावा है कि उनके पति ने इन मांगों को पूरा करने से इनकार किया था और उन्हें लगातार दबाव का सामना करना पड़ रहा था। उन्होंने हत्या की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए विधायक की भूमिका की जांच की अपील की है।


हालांकि विधायक सोनू सिंह ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि उनका हत्या से कोई संबंध नहीं है और उनके खिलाफ लगाए गए आरोप राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं। उन्होंने कहा है कि वह जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करेंगे और सच्चाई सामने आने का इंतजार करेंगे।


फिलहाल पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले में उपलब्ध साक्ष्यों, फॉरेंसिक रिपोर्ट और पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच के दौरान किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है, तो उसके अनुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


इस बीच, यह मामला राजनीतिक रूप भी ले चुका है। विपक्ष निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है, जबकि सत्तापक्ष का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।


फिलहाल यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है कि विधायक के खिलाफ लगाए गए आरोप अभी आरोप मात्र हैं। उनकी संलिप्तता को लेकर कोई न्यायिक या आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। मामले की वास्तविक तस्वीर पुलिस जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।