भारत-चीन सीमा पर रणनीतिक कनेक्टिविटी मजबूत करने की दिशा में भारत ने 1,824 किलोमीटर लंबे अरुणाचल फ्रंटियर हाईवे परियोजना को तेजी देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। यह हाईवे अरुणाचल प्रदेश के दूरदराज और सीमा से सटे इलाकों को बेहतर सड़क नेटवर्क से जोड़ने के लिए तैयार किया जा रहा है। परियोजना के करीब 125 किलोमीटर हिस्से से जुड़ी प्रमुख अड़चनों को दूर किए जाने के बाद निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने में तेजी आने की उम्मीद है। सरकार का लक्ष्य सीमा क्षेत्रों में सड़क और दूसरी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना है, ताकि इन इलाकों तक हर मौसम में बेहतर पहुंच बनाई जा सके।
यह फ्रंटियर हाईवे NH-913 के नाम से भी जाना जाता है। इसकी योजना अरुणाचल प्रदेश के पश्चिमी हिस्से से लेकर पूर्वी हिस्से तक सीमा के करीब स्थित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को जोड़ने की है। सड़क बनने से केवल स्थानीय लोगों की आवाजाही आसान नहीं होगी, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में सेना और सुरक्षा बलों की आवाजाही तथा जरूरी सामान की आपूर्ति भी अधिक तेज हो सकेगी। दुर्गम पहाड़ी इलाकों में बेहतर सड़क नेटवर्क होने से प्रशासन के लिए भी इन क्षेत्रों तक पहुंच बनाना आसान होगा। यही वजह है कि इस परियोजना को सामान्य सड़क परियोजना के साथ-साथ सीमा क्षेत्र के लिए रणनीतिक इंफ्रास्ट्रक्चर के तौर पर भी देखा जा रहा है।
भारत का यह प्रयास ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब चीन भी तिब्बत और सीमा से जुड़े इलाकों में सड़क, सुरंग और अन्य बुनियादी ढांचे को लगातार मजबूत कर रहा है। ऐसे में भारत की ओर से अरुणाचल प्रदेश से लेकर लद्दाख तक सीमा क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। 2029 तक सीमा क्षेत्रों में कनेक्टिविटी को और मजबूत करने का लक्ष्य इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है। इसका उद्देश्य सीमावर्ती इलाकों में विकास को गति देने के साथ-साथ सुरक्षा बलों की रणनीतिक पहुंच और लॉजिस्टिक क्षमता को बेहतर बनाना है। इस तरह 1,824 किलोमीटर का अरुणाचल फ्रंटियर हाईवे आने वाले वर्षों में भारत के सीमा इंफ्रास्ट्रक्चर की एक अहम परियोजना बन सकता है।





