अंधेरे में दौड़ती रही KKRTC की बस, मोबाइल की टॉर्च बनी हेडलाइट! कर्नाटक की घटना ने उठाए गंभीर सवाल

सड़क परिवहन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाली एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम (KKRTC) की एक बस रात के अंधेरे में बिना हेडलाइट के कई किलोमीटर तक चलती रही। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि बस के कंडक्टर ने अपने मोबाइल फोन की टॉर्च जलाकर ड्राइवर को रास्ता दिखाने की कोशिश की, जिसके सहारे बस आगे बढ़ती रही। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।

बताया जा रहा है कि यात्रा के दौरान बस की दोनों हेडलाइट अचानक खराब हो गईं। इसके बावजूद बस को बीच रास्ते रोकने या यात्रियों को सुरक्षित स्थान पर उतारने के बजाय चालक और परिचालक ने मोबाइल की फ्लैशलाइट के सहारे सफर जारी रखा। बस में मौजूद यात्रियों ने इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया, जो अब इंटरनेट पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने सवाल उठाया कि यदि रास्ते में कोई तेज रफ्तार वाहन सामने से आ जाता, कोई पैदल यात्री सड़क पार कर रहा होता या सड़क पर कोई गड्ढा अथवा मोड़ होता, तो बड़ा हादसा हो सकता था। विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक परिवहन में इस प्रकार का जोखिम बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है।

•यात्रियों की जान को खतरा: बिना हेडलाइट के रात में बस चलाना किसी भी समय बड़े सड़क हादसे का कारण बन सकता है।

•दृश्यता में भारी कमी: मोबाइल की टॉर्च हेडलाइट का विकल्प नहीं हो सकती। इसकी रोशनी सीमित होती है और सड़क की पूरी स्थिति स्पष्ट नहीं दिखती।

•सामने से आने वाले वाहनों के लिए खतरा: हेडलाइट न होने से दूसरे वाहन चालकों को बस समय पर दिखाई नहीं देती, जिससे आमने-सामने की टक्कर की आशंका बढ़ जाती है।

•यातायात नियमों का उल्लंघन: खराब हेडलाइट के साथ वाहन चलाना मोटर वाहन सुरक्षा मानकों के विपरीत माना जाता है।

•परिवहन व्यवस्था पर सवाल: यह घटना वाहन रखरखाव (मेंटेनेंस), तकनीकी जांच और सुरक्षा मानकों में संभावित लापरवाही की ओर संकेत करती है।

इस घटना के बाद लोगों ने मांग की है कि संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में किसी भी सार्वजनिक परिवहन वाहन को तकनीकी खराबी की स्थिति में सड़क पर न चलाया जाए। साथ ही, नियमित निरीक्षण और समय पर रखरखाव की व्यवस्था को और अधिक सख्त बनाने की आवश्यकता बताई जा रही है।

यह घटना केवल एक बस की तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि सार्वजनिक परिवहन की सुरक्षा व्यवस्था के प्रति गंभीर चेतावनी भी है। यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और ऐसी लापरवाही पर त्वरित एवं कड़ी कार्रवाई आवश्यक है।