Yaogan-50 सैटेलाइट आखिर अंतरिक्ष में क्यों टूटा? टारगेटिंग डेटा से लेकर ऑर्बिटल डेब्रिस तक पूरी कहानी

चीन के Yaogan-50 (02) सैटेलाइट के अचानक अंतरिक्ष में टूटने की घटना ने वैज्ञानिकों और सुरक्षा विशेषज्ञों का ध्यान खींचा है। मार्च 2026 में लॉन्च किया गया यह सैटेलाइट कुछ ही महीनों बाद ऑर्बिट में बिखर गया और अमेरिकी अंतरिक्ष निगरानी तंत्र ने इसके कम से कम 43 मलबे के टुकड़ों को ट्रैक किया। सबसे बड़ी चिंता यह है कि ये टुकड़े अपेक्षाकृत ऊंची कक्षा में फैल गए हैं, जहां वे लंबे समय तक पृथ्वी के आसपास बने रह सकते हैं। (space4peace.org)Yaogan-50 (02) को 15 मार्च 2026 को चीन के ताइयुआन सैटेलाइट लॉन्च सेंटर से Long March 6A रॉकेट के जरिए लॉन्च किया गया था।

चीन ने इस सीरीज के सैटेलाइट्स को जमीन की निगरानी, फसल उत्पादन का आकलन और आपदा प्रबंधन जैसे कार्यों के लिए बताया है। हालांकि, बाहरी विशेषज्ञ Yaogan सीरीज को व्यापक रूप से सैन्य और निगरानी क्षमताओं से जोड़ते हैं। इस सैटेलाइट को करीब 142 डिग्री की अत्यधिक रेट्रोग्रेड ऑर्बिट में रखा गया था, यानी यह पृथ्वी के घूमने की दिशा के उलट दिशा में चक्कर लगाता था। (space4peace.org)यही असामान्य ऑर्बिट इस मिशन को खास बनाती है।

इस तरह की कक्षा में सैटेलाइट मध्य-अक्षांश वाले क्षेत्रों के ऊपर ज्यादा बार गुजर सकता है, जिससे किसी क्षेत्र की निगरानी या दोबारा इमेजिंग की क्षमता बढ़ सकती है। Yaogan-50 सीरीज के सैन्य उपयोग की सार्वजनिक पुष्टि चीन ने नहीं की है, लेकिन स्वतंत्र स्पेस ट्रैकर्स इसे संभावित मिलिट्री रिमोट-सेंसिंग प्लेटफॉर्म मानते हैं।

(space4peace.org)इस घटना को लेकर एक और वजह से चर्चा बढ़ी है। हाल की रिपोर्टों में दावा किया गया कि ईरान को जॉर्डन स्थित अमेरिकी Muwaffaq Salti Air Base की हाई-रिजॉल्यूशन सैटेलाइट तस्वीरें ईरानी मिसाइल हमले से पहले और बाद में मिली थीं। अमेरिकी अधिकारियों ने इन तस्वीरों को चीन से जुड़े संभावित समर्थन के संकेत के रूप में देखा, जबकि चीन ने ऐसे आरोपों से इनकार किया है। हालांकि, Yaogan-50 के टूटने और उस कथित सैटेलाइट इमेजरी के बीच कोई सीधा संबंध साबित नहीं हुआ है। इसलिए दोनों घटनाओं को जोड़ना फिलहाल केवल अटकल होगी।

Yaogan-50 (02) के टूटने का वास्तविक कारण अभी सामने नहीं आया है। विशेषज्ञों ने संभावित कारणों में propulsion system की खराबी, battery में तकनीकी समस्या या किसी अन्य अंतरिक्ष वस्तु से टक्कर जैसी संभावनाएं बताई हैं। अमेरिकी स्पेस ट्रैकर Jonathan McDowell के अनुसार, मलबे के टुकड़े करीब 600 से 1,100 किलोमीटर की ऊंचाई के बीच पाए गए हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यह बहुत हिंसक विस्फोट जैसा breakup नहीं हो सकता और किसी छोटे battery event या satellite component के टूटने जैसी घटना भी संभव है। (space4peace.org)सबसे बड़ी चिंता अब इस मलबे की लंबी उम्र को लेकर है। 600 किलोमीटर से ऊपर की कक्षाओं में वायुमंडलीय drag काफी कम हो जाता है। इसका मतलब है कि मलबे के कई टुकड़े जल्दी पृथ्वी के वातावरण में वापस आकर जलने के बजाय दशकों या उससे भी अधिक समय तक कक्षा में बने रह सकते हैं।

इससे भविष्य के सैटेलाइट्स के लिए collision risk बढ़ता है और अंतरिक्ष यातायात को ट्रैक करना और जटिल हो जाता है। (space4peace.org)दिलचस्प बात यह है कि चीन के अपने SpaceMapper सिस्टम में भी Yaogan-50 (02) से जुड़े कुछ debris objects दर्ज किए गए हैं। इससे संकेत मिलता है कि चीन को भी breakup की जानकारी है, लेकिन अभी तक चीनी अंतरिक्ष अधिकारियों या CASC की ओर से इस घटना का विस्तृत कारण सार्वजनिक नहीं किया गया है।

(space4peace.org)फिलहाल Yaogan-50 (02) के टूटने की पहेली अनसुलझी है। यह तकनीकी खराबी थी, किसी दूसरे ऑब्जेक्ट से टक्कर या कोई अन्य घटना, इसका जवाब आगे मिलने वाले orbital data से ही मिल सकेगा। लेकिन एक बात स्पष्ट है कि इस breakup ने अंतरिक्ष में बढ़ते मलबे और उससे पैदा होने वाले दीर्घकालिक सुरक्षा जोखिम को एक बार फिर सामने ला दिया है। इसके साथ ही, सैटेलाइट इमेजरी के बढ़ते सैन्य महत्व ने इस घटना को केवल एक तकनीकी अंतरिक्ष दुर्घटना के बजाय रणनीतिक नजरिए से भी महत्वपूर्ण बना दिया है।