सुप्रीम कोर्ट में शिवसेना नाम और चुनाव चिन्ह विवाद की सुनवाई जारी, EC के फैसले पर उठे सवाल

नई दिल्ली: शिवसेना के पार्टी नाम और ‘धनुष-बाण’ चुनाव चिन्ह को लेकर चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट में निर्णायक कानूनी बहस के दौर में है। सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ इस मामले में उद्धव ठाकरे गुट की उस चुनौती पर सुनवाई कर रही है, जिसमें चुनाव आयोग के 17 फरवरी 2023 के फैसले को चुनौती दी गई है। चुनाव आयोग ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट को शिवसेना का नाम और ‘धनुष-बाण’ चुनाव चिन्ह आवंटित किया था।17 सितंबर की सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने चुनाव आयोग के फैसले में इस्तेमाल किए गए legislative majority test पर सवाल उठाए। कोर्ट ने यह भी पूछा कि जब विधायकों की अयोग्यता से जुड़ी कार्यवाही लंबित थी, तब उनकी संख्या को पार्टी के समर्थन का आधार मानना कितना उचित था।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि क्या चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को अलग-अलग चुनाव चिन्ह देकर चुनाव लड़ने का विकल्प पूरी तरह विचार किया था। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायिक समीक्षा के तहत वह चुनाव आयोग की जगह अपना विवेक नहीं लगा सकता, लेकिन यह जांच सकता है कि आयोग ने सभी प्रासंगिक तथ्यों और उपलब्ध विकल्पों पर विचार किया या नहीं।वहीं, शिंदे गुट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नीरज किशन कौल ने चुनाव आयोग के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि विधायी संख्या और चुनावी आंकड़ों को पार्टी के प्रतिनिधित्व का आकलन करने में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा और लोकसभा चुनावों के आंकड़ों का भी हवाला दिया।

मामले की सुनवाई 22 सितंबर को भी सूचीबद्ध है। इस विवाद का फैसला न केवल शिवसेना के नाम और चुनाव चिन्ह से जुड़ा है, बल्कि राजनीतिक दलों के भीतर विभाजन की स्थिति में संगठनात्मक समर्थन, विधायी बहुमत और चुनाव आयोग की शक्तियों की कानूनी व्याख्या पर भी असर डाल सकता है।