RBI का बड़ा फैसला: बाजार से ₹1 लाख करोड़ की लिक्विडिटी क्यों खींची जा रही है?

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग सिस्टम में बढ़ी अतिरिक्त नकदी यानी surplus liquidity को कम करने के लिए करीब ₹1 लाख करोड़ के सरकारी बॉन्ड बेचने का फैसला किया है। यह बिक्री तीन चरणों में होगी—17 सितंबर को ₹50,000 करोड़ और 21 व 28 सितंबर को ₹25,000-₹25,000 करोड़ के दो चरणों में। दरअसल, हाल के दिनों में बैंकों के पास नकदी बहुत ज्यादा बढ़ गई है और सितंबर में surplus liquidity करीब ₹10.25 लाख करोड़ के आसपास पहुंच गई। इसका बड़ा कारण विदेशी मुद्रा जुटाने की एक विशेष योजना के तहत बैंकों द्वारा करीब $127 अरब जुटाया जाना है, जिसे RBI के साथ लेन-देन के बाद घरेलू बैंकिंग सिस्टम में बड़ी मात्रा में रुपये की liquidity मिली।


RBI के लिए समस्या सिर्फ इतना पैसा होना नहीं है, बल्कि बहुत ज्यादा liquidity के कारण short-term interest rates का नीचे जाना है। हाल में overnight rates RBI के 5.25% repo rate से भी नीचे चले गए, जिससे मौद्रिक नीति का असर कमजोर पड़ सकता था। RBI ने पहले VRRR यानी Variable Rate Reverse Repo और foreign-exchange swaps के जरिए अतिरिक्त पैसा सोखने की कोशिश की, लेकिन बैंकों की तरफ से इन उपायों में अपेक्षित भागीदारी नहीं मिली। ऐसे में RBI ने अब OMO यानी Open Market Operations के जरिए सरकारी बॉन्ड बेचकर सीधे सिस्टम से रुपये निकालने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य बाजार में पैसों की कमी पैदा करना नहीं, बल्कि जरूरत से ज्यादा नकदी को नियंत्रित करके ब्याज दरों और वित्तीय बाजार को संतुलित रखना है।


इस फैसले का असर बॉन्ड मार्केट, सरकार की उधारी, बैंकों और आगे चलकर लोन की ब्याज दरों पर पड़ सकता है। RBI जब बड़ी मात्रा में सरकारी बॉन्ड बेचता है तो बाजार में बॉन्ड की supply बढ़ती है, जिससे उनकी कीमतों पर दबाव और yield बढ़ने की संभावना रहती है। इससे सरकार की borrowing cost भी बढ़ सकती है और बाजार में ब्याज दरों पर दबाव आ सकता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि RBI आम लोगों के बैंक खातों से ₹1 लाख करोड़ निकाल रहा है; यह मुख्य रूप से बैंकिंग सिस्टम की अतिरिक्त liquidity को absorb करने की monetary-policy कार्रवाई है। RBI का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि बाजार में पर्याप्त पैसा मौजूद रहे, लेकिन इतनी अतिरिक्त नकदी न हो कि महंगाई, ब्याज दरों और वित्तीय स्थिरता पर दबाव बढ़ने लगे।