KGMU धर्मांतरण मामला: पीड़ित महिला डॉक्टर ने छोड़ा कैंपस, पढ़ाई और करियर पर पड़ा असर

लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में कथित धर्मांतरण और उत्पीड़न का मामला एक बार फिर चर्चा में है। इस मामले में शिकायत करने वाली महिला रेजिडेंट डॉक्टर ने विश्वविद्यालय का कैंपस छोड़ दिया है। बताया जा रहा है कि वह पिछले करीब 10 महीने से अपने गृह राज्य में रह रही हैं। इस पूरे घटनाक्रम का असर उनकी पढ़ाई और मेडिकल करियर पर भी पड़ा है।

जानकारी के मुताबिक, पीड़िता KGMU के पैथोलॉजी विभाग में एमडी की पढ़ाई कर रही थीं। उन्होंने अपने साथी रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. रमीज मलिक पर शादी का झांसा देकर शोषण करने और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया था। शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपी डॉक्टर को गिरफ्तार किया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच भी शुरू की गई।

पीड़िता के परिवार का आरोप है कि कैंपस में पढ़ाई जारी रखना उनके लिए मुश्किल हो गया था। सुरक्षा को लेकर चिंता और विश्वविद्यालय में पर्याप्त सहयोग नहीं मिलने के कारण उन्होंने कैंपस छोड़ने का फैसला किया। उनके पिता ने विश्वविद्यालय प्रशासन को पत्र लिखकर बेटी की स्थिति और पढ़ाई में आ रही परेशानियों की जानकारी भी दी थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पीड़िता ने विश्वविद्यालय से पढ़ाई छोड़ने के लिए औपचारिक रूप से इस्तीफा देने की प्रक्रिया भी शुरू की थी। हालांकि, प्रशासन ने जांच जारी होने का हवाला देते हुए इसे फिलहाल स्वीकार नहीं किया। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से उन्हें वापस बुलाने, काउंसलिंग कराने और सुरक्षा सहित जरूरी मदद देने का भरोसा भी दिया गया है।

इस मामले की जांच उत्तर प्रदेश एसटीएफ कर रही है। जांच में विश्वविद्यालय के कुछ डॉक्टरों और कर्मचारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठे हैं। रिपोर्ट में शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई नहीं करने और उत्पीड़न से जुड़ी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लेने जैसे मुद्दों का जिक्र किया गया है।

इस पूरे मामले ने प्रदेश के बड़े चिकित्सा संस्थान KGMU में महिला डॉक्टरों की सुरक्षा, शिकायतों के निपटारे और प्रशासन की जिम्मेदारी को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि पीड़िता की पढ़ाई दोबारा कैसे शुरू होगी और उन्हें कब तक न्याय और सुरक्षित माहौल मिल पाएगा।