इंडियन नेवी के लिए 8 नेक्स्ट-जेन स्टील्थ वॉरशिप बनाने को मंजूरी, 40 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा होंगे खर्च

भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) ने नौसेना के लिए आठ नई नेक्स्ट-जेनरेशन कॉर्वेट यानी आधुनिक युद्धपोत बनाने की मंजूरी दे दी है। इस पूरे प्रोजेक्ट पर 40 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए जाएंगे। इन युद्धपोतों को आधुनिक तकनीक और स्वदेशी स्टील्थ डिजाइन के साथ भारत में ही तैयार किया जाएगा।

इन आठ युद्धपोतों का निर्माण कोलकाता की सरकारी कंपनी गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) और गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) करेंगी। योजना के तहत GRSE पांच और गोवा शिपयार्ड तीन युद्धपोत बनाएगा। अधिकारियों के मुताबिक, दोनों कंपनियों के साथ औपचारिक समझौते पर आने वाले दिनों में हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। पहले युद्धपोत की डिलीवरी 2030 तक करने का लक्ष्य रखा गया है।

ये युद्धपोत करीब 2,000 टन वजन के होंगे और लगभग 30 नॉट की रफ्तार से चल सकेंगे। इनका डिजाइन भारतीय नौसेना ने खुद तैयार किया है। स्टील्थ तकनीक के कारण इन्हें दुश्मन के रडार की पकड़ में आने से बचने में मदद मिलेगी। इन्हें कई तरह के समुद्री अभियानों के लिए तैयार किया जाएगा। इनमें दुश्मन के जहाजों और पनडुब्बियों का मुकाबला करना, हवाई हमलों से बचाव, समुद्री निगरानी, तटीय सुरक्षा और जरूरत पड़ने पर बचाव अभियान चलाना शामिल है।

इस परियोजना में 70 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किए जाने की योजना है। इससे देश की रक्षा कंपनियों और छोटे उद्योगों को काम मिलेगा। साथ ही जहाज निर्माण से जुड़े क्षेत्र में हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। यह परियोजना आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी मजबूती देगी और रक्षा उपकरणों के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता कम करने में मदद करेगी।

इस परियोजना को शुरुआती मंजूरी जून 2022 में रक्षा अधिग्रहण परिषद ने दी थी। उस समय इसकी अनुमानित लागत करीब 36 हजार करोड़ रुपये रखी गई थी। अब कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी की मंजूरी के बाद यह परियोजना आगे बढ़ेगी। इन नए युद्धपोतों के शामिल होने से हिंद महासागर क्षेत्र में भारतीय नौसेना की निगरानी और सुरक्षा क्षमता मजबूत होगी। इससे भारत को अपने समुद्री रास्तों, तटों और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने में मदद मिलेगी।