दुनिया में बढ़ती तेल और डीजल की कीमतों के बीच G7 देशों ने बड़ा कदम उठाया है। G7 देशों ने अपने रणनीतिक आपात तेल भंडार से करीब 10 करोड़ बैरल कच्चा तेल और ईंधन बाजार में जारी करने पर सहमति जताई है। यह सप्लाई करीब चार महीने तक जारी रहने की योजना है। इसका मकसद वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ते दबाव को कम करना और ईंधन की उपलब्धता बनाए रखना है।
इस योजना में डीजल की सप्लाई को प्राथमिकता दी जाएगी। पहले चरण में बड़ी मात्रा में डीजल बाजार में उतारने की तैयारी है। इस पूरी प्रक्रिया के लिए अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी यानी IEA के साथ तालमेल किया जाएगा। G7 देशों ने जरूरत पड़ने पर एक-दूसरे के बीच ऊर्जा उत्पादों की सप्लाई बनाए रखने पर भी सहमति जताई है।
यह फैसला ऐसे समय हुआ है जब दुनिया के कई हिस्सों में ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ा हुआ है। अमेरिका में भी डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर चिंता बनी हुई थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोपीय देशों से अपने रणनीतिक भंडार का इस्तेमाल कर डीजल की सप्लाई बढ़ाने की अपील की थी। G7 के फैसले के बाद अमेरिका ने भी डीजल निर्यात पर संभावित प्रतिबंध को लेकर अपना रुख नरम किया है।
G7 की योजना केवल रणनीतिक भंडार से तेल निकालने तक सीमित नहीं है। सदस्य देशों ने रिफाइनरियों के रखरखाव कार्यक्रमों में बेहतर तालमेल और जहां संभव हो, वहां उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर भी सहमति जताई है। इससे डीजल और दूसरे रिफाइंड ईंधनों की सप्लाई बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, इस फैसले का बाजार पर वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि अलग-अलग देश अपने भंडार से ईंधन कितनी तेजी से जारी करते हैं और रिफाइनिंग क्षमता कितनी उपलब्ध रहती है। G7 ने IEA को बाजार की स्थिति पर नजर रखने और आगे की जरूरतों को लेकर सुझाव देने की जिम्मेदारी दी है। अगर जरूरत महसूस हुई तो भविष्य में अतिरिक्त ईंधन जारी करने पर भी विचार किया जा सकता है।





