भारत में मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव प्रक्रिया को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों का मुद्दा अब अमेरिका तक पहुंच गया है। अमेरिका के छह सांसदों ने विदेश मंत्री मार्को रुबियो को पत्र लिखकर उनसे भारत दौरे के दौरान इन मुद्दों को भारतीय अधिकारियों के सामने उठाने की अपील की है। सांसदों ने लोकतांत्रिक अधिकारों, मानवाधिकारों और चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी चिंताओं पर चर्चा करने की मांग की है।
इस पत्र में सांसदों ने भारत में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर उठ रहे सवालों का जिक्र किया है। CJP और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) से जुड़े प्रदर्शनकारी इस प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का विरोध कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की जाए और उन्हें पद से हटाया जाए।
दिल्ली में 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस में प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ प्रदर्शन को लेकर भी विवाद सामने आया। इस दौरान CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके और AISA नेता नेहा बोरा को हिरासत में लिए जाने की खबरें आईं। प्रदर्शनकारियों और विपक्षी नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।
अमेरिकी सांसदों ने अपने पत्र में दावा किया कि वर्ष 2025 से अब तक करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने को लेकर चिंता जताई गई है। हालांकि, यह आंकड़ा पत्र में उठाए गए दावे के रूप में देखा जाना चाहिए। सांसदों ने यह आरोप भी लगाया कि अमेरिका में भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावासों से जुड़े लोगों ने प्रदर्शनकारियों पर नजर रखने के लिए फोटोग्राफर भेजे। उन्होंने इस मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।
इस पत्र पर अमेरिका की छह डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। इनमें प्रमिला जयपाल, इल्हान उमर, जिम मैकगवर्न और रशीदा तलीब के नाम शामिल हैं। वहीं, भारत की ओर से इस तरह के आरोपों को आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप से जुड़ी चिंता के तौर पर देखा गया है। भारतीय-अमेरिकी नेता अजय जैन भूटोरिया ने भी सांसदों के पत्र की आलोचना करते हुए कहा कि इससे भारत-अमेरिका संबंधों पर असर पड़ सकता है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि मार्को रुबियो भारत दौरे के दौरान इन मुद्दों को उठाते हैं या नहीं। यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब भारत में चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक बहस जारी है।





