समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान को दो पैन कार्ड मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने दोनों की जमानत अर्जियां मंजूर करते हुए उनकी सजा निलंबित कर दी है। हालांकि, अदालत ने उनकी दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगाई है। इसका मतलब है कि दोनों को फिलहाल सजा के मामले में राहत मिली है, लेकिन निचली अदालत का दोषी ठहराने वाला फैसला बरकरार रहेगा। जेल से रिहाई का रास्ता भी अन्य लंबित मामलों और कानूनी औपचारिकताओं पर निर्भर करेगा।
यह मामला अब्दुल्ला आजम के नाम पर कथित तौर पर दो पैन कार्ड बनवाने और उनका इस्तेमाल करने से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार, दोनों पैन कार्डों में उनकी जन्मतिथि अलग-अलग दर्ज थी। एक कार्ड में जन्मतिथि 1 जनवरी 1993 और दूसरे में 30 सितंबर 1990 बताई गई थी। आरोप है कि अलग-अलग जन्मतिथियों वाले इन दस्तावेजों का इस्तेमाल आधिकारिक कार्यों में किया गया। भाजपा विधायक आकाश सक्सेना की शिकायत के बाद वर्ष 2019 में इस मामले में मुकदमा दर्ज किया गया था। इसमें आजम खान पर अपने बेटे के साथ कथित साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया गया।
रामपुर की विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने नवंबर 2025 में आजम खान और अब्दुल्ला आजम को दोषी ठहराते हुए सात-सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। इसके बाद अपीलीय अदालत ने आजम खान की सजा बढ़ाकर 10 साल कर दी और उन पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया। अब्दुल्ला आजम की सात साल की सजा बरकरार रखी गई, जबकि उनका जुर्माना बढ़ाकर 3.50 लाख रुपये कर दिया गया। दोनों ने इस फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी और सजा निलंबित करने के साथ जमानत देने की मांग की थी।
मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें अदालत के सामने रखी गईं। इसके बाद हाईकोर्ट ने जमानत अर्जियां स्वीकार करते हुए सजा निलंबित करने का आदेश दिया। हालांकि, दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगाई गई, इसलिए मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। जमानत मिलने का अर्थ यह नहीं है कि दोनों को आरोपों से पूरी तरह बरी कर दिया गया है। यदि किसी अन्य मामले में उनकी हिरासत से जुड़ी कानूनी बाधा मौजूद है, तो रिहाई प्रभावित हो सकती है। खासकर आजम खान की रिहाई की स्थिति उनके खिलाफ लंबित अन्य मामलों पर भी निर्भर करेगी।
हाईकोर्ट के इस फैसले को आजम खान और उनके परिवार के लिए महत्वपूर्ण कानूनी राहत माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम के लिए यह फैसला आगे की कानूनी लड़ाई में अहम है। हालांकि, अंतिम स्थिति का निर्धारण मामले की आगे की सुनवाई और अन्य लंबित कानूनी प्रक्रियाओं के आधार पर होगा। फिलहाल अदालत के आदेश से दोनों को सजा के मामले में राहत मिली है, लेकिन दोषसिद्धि से जुड़ा विवाद अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।





