CJI ने राहुल गांधी और खरगे से मिलने से किया इनकार, कहा- शक्तियों के बंटवारे के सिद्धांत का होगा उल्लंघन

नई दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात करने से इनकार कर दिया है। दोनों नेताओं ने चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी अपनी चिंताओं को लेकर CJI से मिलने का समय मांगा था। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि इस तरह की मुलाकात संवैधानिक शक्तियों के बंटवारे के सिद्धांत के खिलाफ हो सकती है।

राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने 12 अक्टूबर को शाम 4 से 5 बजे के बीच मुलाकात के लिए समय मांगा था। दोनों नेता मुख्य न्यायाधीश को एक ज्ञापन सौंपना चाहते थे। इसमें कथित वोट चोरी, चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ियों और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को उठाया जाना था। विपक्ष लंबे समय से इन मामलों को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहा है।

विपक्ष की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को रोकने और बैलेट पेपर से दोबारा चुनाव कराने जैसी मांगें भी उठाई गई हैं। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि मौजूदा चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता से जुड़े सवाल हैं। हालांकि, ये विपक्ष के आरोप हैं, जिन्हें साबित तथ्य नहीं माना जा सकता।

CJI के इस फैसले के बाद न्यायपालिका और विपक्ष के बीच संवैधानिक मर्यादाओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है। शक्तियों के बंटवारे के सिद्धांत के अनुसार, सरकार, संसद और न्यायपालिका की अपनी अलग-अलग जिम्मेदारियां और अधिकार हैं। न्यायपालिका का काम कानून के अनुसार मामलों की सुनवाई करना और न्याय देना है। चुनाव से जुड़ी शिकायतों को उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत में उठाया जा सकता है।

इस मामले को लेकर भाजपा ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा है। भाजपा नेताओं ने विपक्ष के कदम पर सवाल उठाते हुए कहा कि न्यायपालिका को राजनीतिक विवादों से दूर रखा जाना चाहिए। वहीं, विपक्ष चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग पर कायम है। CJI के इनकार के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विपक्ष अपनी मांगों को आगे बढ़ाने के लिए कौन-सा कानूनी रास्ता अपनाता है।