CJI का स्पष्टीकरण: प्रदर्शन को लेकर कोई याचिका नहीं मिली थी

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने छात्र प्रदर्शन से जुड़े मामले पर मीडिया में आई खबरों को लेकर बड़ा स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के समक्ष इस मामले में कोई औपचारिक याचिका (रिट पिटीशन) दायर ही नहीं की गई थी, इसलिए यह कहना गलत है कि अदालत ने सुनवाई से इनकार कर दिया।


सीजेआई ने खुली अदालत में कहा कि उनके पास केवल एक प्रतिनिधित्व (representation) या पत्र पहुंचा था, जिसे कानूनी रूप से दायर याचिका नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि जब कोई विधिवत याचिका ही दाखिल नहीं हुई, तो उसके सूचीबद्ध (लिस्ट) न होने का सवाल ही नहीं उठता।


जस्टिस सूर्यकांत ने उन मीडिया रिपोर्टों को “गैर-जिम्मेदाराना” और “लापरवाह” (reckless) बताया, जिनमें दावा किया गया था कि सुप्रीम कोर्ट ने छात्र प्रदर्शन से जुड़ी याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि तथ्य सामने आने से पहले ऐसी खबरें प्रकाशित नहीं की जानी चाहिए।


इससे पहले, एक वकील ने छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा तत्काल उठाने की कोशिश की थी। उस दौरान सीजेआई ने कहा था कि अदालत वीडियो देखने के आधार पर तत्काल कार्रवाई नहीं करेगी और उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि उस मामले में कोई औपचारिक याचिका दाखिल नहीं की गई थी।


सीजेआई के इस स्पष्टीकरण के बाद यह साफ हो गया है कि अदालत का कहना है कि मामला विधिवत याचिका के रूप में उसके समक्ष आया ही नहीं था। इसलिए सुनवाई से इनकार किए जाने संबंधी खबरें तथ्यात्मक रूप से सही नहीं थीं।