BRICS 2026 के बाद भारत की विदेश नीति में Global South, व्यापार और टेक्नोलॉजी पर फोकस

BRICS 2026 की अध्यक्षता और नई दिल्ली में हुए 18वें शिखर सम्मेलन के बाद भारत की विदेश नीति में Global South और बहुपक्षीय सहयोग प्रमुख मुद्दों में रहे। नई दिल्ली घोषणा में विकासशील देशों की वैश्विक संस्थाओं में अधिक भागीदारी और संयुक्त राष्ट्र समेत बहुपक्षीय व्यवस्था में सुधार पर जोर दिया गया।भारत ने आर्थिक सहयोग को भी प्रमुखता दी। BRICS में व्यापार, निवेश, resilient supply chains, cross-border payments और विकासशील देशों की global value chains में भागीदारी बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। इससे भारत के लिए उभरते बाजारों के साथ आर्थिक संबंध मजबूत करने का एक मंच मिला।

Technology और digital cooperation भी भारत की BRICS प्राथमिकताओं में रहा। Digital Public Infrastructure (DPI), Artificial Intelligence और Industry 4.0 जैसे क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। BRICS घोषणा में DPI से जुड़े साझा प्रोजेक्ट और AI governance पर सहयोग का उल्लेख किया गया।विदेश नीति के स्तर पर रणनीतिक स्वायत्तता और संवाद भी महत्वपूर्ण रहे। BRICS घोषणा में अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान, कूटनीति और multilateral cooperation पर जोर दिया गया। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की BRICS के दौरान हुई बैठक में द्विपक्षीय संबंधों, सीमा पर शांति और व्यापार व supply-chain से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।

कुल मिलाकर, BRICS 2026 के बाद भारत के विदेश नीति एजेंडे में Global South की आवाज, आर्थिक और तकनीकी सहयोग, बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार और प्रमुख देशों के साथ संतुलित संबंध महत्वपूर्ण विषय बने हुए हैं। हालांकि, इन पहलों का वास्तविक प्रभाव आगे होने वाले समझौतों और उनके implementation पर निर्भर करेगा।