इजराइल की राजनीति में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को सत्ता से हटाने की कोशिशें तेज हो गई हैं। पूर्व सेना प्रमुख और याशर पार्टी के नेता गादी आइजनकोट ने नई सरकार बनाने के लिए चार अहम शर्तें रखी हैं। उनका कहना है कि इन शर्तों को स्वीकार करने वाले किसी भी सांसद को गठबंधन में शामिल होने का अवसर दिया जा सकता है। उनकी प्रमुख मांगों में सभी नागरिकों के लिए सैन्य, राष्ट्रीय या नागरिक सेवा अनिवार्य करना शामिल है। इसका मतलब है कि हरेदी यानी अति-रूढ़िवादी यहूदी समुदाय के लोगों को भी देश की सेवा करनी होगी।
आइजनकोट की पहली शर्त है कि इजराइल एक यहूदी, लोकतांत्रिक, उदार और समानता पर आधारित देश बना रहे। दूसरी शर्त में उन्होंने इजराइल की स्वतंत्रता की घोषणा में बताए गए मूल्यों का पालन करने की बात कही है। तीसरी शर्त के अनुसार देश के सभी नागरिकों को सैन्य, राष्ट्रीय या नागरिक सेवा करनी होगी। चौथी शर्त हमास से जुड़ी है। आइजनकोट चाहते हैं कि हमास को आतंकवादी संगठन माना जाए और गाजा में उसकी सैन्य तथा शासन व्यवस्था को समाप्त करने की प्रतिबद्धता दिखाई जाए।
इन शर्तों के साथ आइजनकोट नेतन्याहू के खिलाफ विपक्षी दलों को एकजुट करने में जुटे हैं। उन्होंने विपक्ष के प्रमुख नेताओं से बातचीत भी शुरू कर दी है। इसमें यायर लैपिड के साथ उनकी मुलाकात अहम मानी जा रही है। उनका उद्देश्य ऐसा व्यापक गठबंधन तैयार करना है, जो संसद में बहुमत हासिल कर नेतन्याहू की सरकार को सत्ता से बाहर कर सके। आइजनकोट ने साफ किया है कि उनकी सरकार में शामिल होने का रास्ता उन्हीं सांसदों के लिए खुला होगा, जो इन चार सिद्धांतों पर सहमत होंगे।
इजराइल के हालिया चुनाव के बाद किसी भी गठबंधन के लिए 120 सदस्यीय संसद में 61 सीटों का समर्थन जरूरी है। चुनावी नतीजों में नेतन्याहू के गठबंधन को 53 सीटें मिली हैं, जबकि आइजनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी खेमे को 48 सीटें हासिल हुई हैं। अरब पार्टियों के पास कुल 19 सीटें हैं। ऐसे में सरकार बनाने के लिए विपक्ष को अतिरिक्त समर्थन जुटाना होगा। अरब पार्टियों का समर्थन मिलने पर आइजनकोट का खेमा बहुमत के करीब पहुंच सकता है, लेकिन इस विकल्प को लेकर विपक्षी गठबंधन के भीतर भी मतभेद हैं।
आइजनकोट के सामने सबसे बड़ी चुनौती हरेदी समुदाय और अरब पार्टियों को लेकर अपने सहयोगियों के बीच सहमति बनाना है। हरेदी पार्टियां अपने समुदाय को सैन्य सेवा से छूट देने की मांग करती रही हैं, जबकि आइजनकोट सभी नागरिकों के लिए सेवा अनिवार्य करना चाहते हैं। दूसरी ओर, कुछ विपक्षी दल अरब पार्टियों के साथ सरकार बनाने के पक्ष में नहीं हैं। ऐसे में नेतन्याहू को सत्ता से हटाने की रणनीति आसान नहीं दिख रही है। आने वाले दिनों में गठबंधन को लेकर होने वाली बातचीत तय करेगी कि इजराइल में नई सरकार बन पाएगी या देश को फिर से चुनाव की ओर जाना पड़ेगा।




