भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल आधिकारिक दौरे पर वियतनाम की राजधानी हनोई पहुंचे हैं। उनकी इस यात्रा को भारत और वियतनाम के बीच रणनीतिक और सुरक्षा संबंधों को मजबूत करने के लिहाज से अहम माना जा रहा है। दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र के हालात पर चर्चा हो रही है। चीन के साथ दोनों देशों के संबंधों और दक्षिण चीन सागर में बढ़ते तनाव को देखते हुए इन मुद्दों पर बातचीत को खास महत्व दिया जा रहा है।
डोभाल ने 2 नवंबर को वियतनाम के उप प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री जनरल फान वान जियांग से मुलाकात की। इस दौरान दोनों पक्षों ने आपसी रक्षा सहयोग की मौजूदा स्थिति की समीक्षा की और इस क्षेत्र में साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमति जताई। इसके अलावा वियतनाम के शीर्ष नेतृत्व के साथ उनकी बातचीत में आतंकवाद से मुकाबला, खुफिया जानकारी साझा करने, साइबर सुरक्षा और उभरती तकनीकों में सहयोग जैसे मुद्दे भी शामिल हैं।
दक्षिण चीन सागर का मुद्दा भी इस यात्रा के लिहाज से अहम है। चीन इस समुद्री क्षेत्र के बड़े हिस्से पर अपना दावा करता है, जबकि वियतनाम समेत कई देशों के साथ उसके क्षेत्रीय विवाद हैं। भारत भी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, नौवहन की स्वतंत्रता और अंतरराष्ट्रीय नियमों के पालन का समर्थन करता है। ऐसे में भारत और वियतनाम के बीच समुद्री सुरक्षा पर सहयोग बढ़ाने को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, चीन और दक्षिण चीन सागर पर हुई किसी विशेष सहमति या फैसले की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
डोभाल का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब भारत और वियतनाम अपने संबंधों को नई ऊंचाई देने की दिशा में काम कर रहे हैं। मई 2026 में वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को ‘एन्हांस्ड कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ का दर्जा दिया था। साथ ही 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 25 अरब डॉलर सालाना तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया। अक्टूबर में दोनों देशों के बीच चौथी सुरक्षा वार्ता भी हुई थी, जिसमें आतंकवाद, साइबर सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा और आर्थिक सुरक्षा जैसे विषयों पर चर्चा हुई थी। डोभाल की मौजूदा यात्रा को इसी सहयोग को आगे बढ़ाने की अहम कड़ी माना जा रहा है।





