पंजाब में AAP को बड़ा झटका, कुंवर विजय प्रताप सिंह, चेतन सिंह जौड़ामाजरा और हरमीत सिंह पठानमाजरा BJP में शामिल

पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) को बड़ा झटका देते हुए उसके तीन विधायक भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए हैं। कुंवर विजय प्रताप सिंह, चेतन सिंह जौड़ामाजरा और हरमीत सिंह पठानमाजरा ने 2 नवंबर को दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इस घटनाक्रम को पंजाब में भाजपा के लिए बड़ी राजनीतिक बढ़त और आम आदमी पार्टी के लिए झटके के रूप में देखा जा रहा है।

तीनों नेताओं के पार्टी छोड़ने का फैसला ऐसे समय आया है, जब आम आदमी पार्टी ने 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए अपने 40 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की है। इसके एक दिन बाद 1 नवंबर को चेतन सिंह जौड़ामाजरा और हरमीत सिंह पठानमाजरा ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। वहीं, अमृतसर नॉर्थ से विधायक और पूर्व आईपीएस अधिकारी कुंवर विजय प्रताप सिंह ने 2 नवंबर को विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद भाजपा का दामन थाम लिया।

हरमीत सिंह पठानमाजरा पंजाब की सनौर सीट और चेतन सिंह जौड़ामाजरा समाना सीट से विधायक हैं, जबकि कुंवर विजय प्रताप सिंह अमृतसर नॉर्थ का प्रतिनिधित्व करते थे। कुंवर विजय प्रताप पहले भी पार्टी नेतृत्व के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके थे। जून 2025 में आम आदमी पार्टी ने उन्हें पांच साल के लिए निलंबित कर दिया था।

पार्टी छोड़ने के बाद दोनों विधायकों ने आम आदमी पार्टी के नेतृत्व पर कई आरोप लगाए। उनका कहना था कि पंजाब की सरकार में दिल्ली के नेताओं का हस्तक्षेप बढ़ रहा है। उन्होंने राज्य में बढ़ते अपराध, नशे, भ्रष्टाचार और गैंगस्टर गतिविधियों को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। वहीं, कुंवर विजय प्रताप सिंह ने पंजाब में साफ राजनीति और पारदर्शी प्रशासन की जरूरत पर जोर दिया।

इस घटनाक्रम के बाद आम आदमी पार्टी ने भी कड़ा रुख अपनाया है। पार्टी ने चेतन सिंह जौड़ामाजरा और हरमीत सिंह पठानमाजरा की विधानसभा सदस्यता रद्द कराने के लिए विधानसभा अध्यक्ष से संपर्क करने की बात कही है। पार्टी का कहना है कि दोनों विधायक पहले ही पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण निलंबित किए जा चुके थे।

तीन विधायकों के भाजपा में शामिल होने से पंजाब की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना है। खास बात यह है कि यह घटनाक्रम 2027 के विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले हुआ है। ऐसे में आने वाले दिनों में पंजाब में राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और चुनावी गतिविधियां और तेज हो सकती हैं।