सावधान! ईयरफोन का अत्यधिक उपयोग बन सकता है बहरापन का कारण

आज के डिजिटल दौर में ईयरफोन और हेडफोन का इस्तेमाल लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन गया है। चाहे संगीत सुनना हो, ऑनलाइन मीटिंग करना हो या मोबाइल पर वीडियो देखना, लंबे समय तक ईयरफोन का उपयोग आम बात हो गई है। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, जरूरत से ज्यादा और तेज आवाज में ईयरफोन का इस्तेमाल सुनने की क्षमता पर गंभीर असर डाल सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक 85 डेसिबल से अधिक आवाज में ऑडियो सुनने से कान की अंदरूनी कोशिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है। समय के साथ यह समस्या सुनने की क्षमता कम होने (हियरिंग लॉस) या कुछ मामलों में स्थायी बहरेपन का कारण भी बन सकती है। इसके अलावा कानों में लगातार घंटी बजने जैसी आवाज (टिनिटस), कान में दर्द और संक्रमण जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ईयरफोन का उपयोग करते समय 60/60 नियम अपनाएं—अधिकतम वॉल्यूम का 60 प्रतिशत से अधिक आवाज न रखें और लगातार 60 मिनट से ज्यादा उपयोग न करें। इसके बाद कुछ समय का ब्रेक जरूर लें। शोर-शराबे वाले माहौल में आवाज बढ़ाने के बजाय नॉइज़-कैंसलिंग हेडफोन का इस्तेमाल करना बेहतर हो सकता है।
यदि कानों में दर्द, आवाज कम सुनाई देना, लगातार सीटी या घंटी जैसी आवाज सुनाई देना या सुनने में परेशानी महसूस हो, तो बिना देरी किए ईएनटी (कान, नाक और गला) विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए।
सही तरीके से और सीमित समय तक ईयरफोन का उपयोग करके सुनने की क्षमता को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर भविष्य में होने वाली गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है।