गुजरात में आलू प्रसंस्करण को मिलेगा बढ़ावा, पीएम मोदी ने बनास डेयरी के फ्रेंच फ्राइज प्लांट का किया ई-लोकार्पण

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 अक्टूबर को गुजरात के बनासकांठा जिले में बनास डेयरी के विस्तारित फ्रेंच फ्राइज प्रोसेसिंग प्लांट का ई-लोकार्पण किया। वाव-थराद जिले की दियोदर तहसील के सणादर गांव में स्थित इस प्लांट के विस्तार पर 51.65 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इससे आलू से फ्रेंच फ्राइज बनाने की क्षमता बढ़ेगी और क्षेत्र के किसानों को अपनी उपज के लिए बेहतर बाजार मिलने की उम्मीद है।

इस प्लांट की उत्पादन क्षमता पहले प्रति घंटे 2 टन थी, जिसे बढ़ाकर अब 5 टन कर दिया गया है। इसका विस्तार करने का काम अप्रैल 2026 में शुरू हुआ था। नई व्यवस्था से आलू की अधिक मात्रा का प्रसंस्करण किया जा सकेगा। इससे स्थानीय स्तर पर आलू की मांग बढ़ने के साथ किसानों को अपनी फसल बेचने के नए अवसर मिलेंगे।

बनासकांठा गुजरात के प्रमुख आलू उत्पादक जिलों में शामिल है। पिछले 25 वर्षों में यहां प्रोसेसिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले आलू की खेती का क्षेत्र लगभग 400 हेक्टेयर से बढ़कर 61,016 हेक्टेयर हो गया है। वर्ष 2024-25 में जिले में करीब 18.7 लाख टन आलू का उत्पादन हुआ था। बनास डेयरी ने किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराने से लेकर आलू की खेती, खरीद, भंडारण और फ्रेंच फ्राइज बनाने तक की पूरी व्यवस्था विकसित की है।

इस व्यवस्था में रोगमुक्त बीज तैयार करने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। डेयरी किसानों को बीज उपलब्ध कराते समय ही आलू की खरीद कीमत तय कर देती है, जिससे किसानों को फसल बेचने की कीमत को लेकर पहले से जानकारी रहती है। वर्ष 2024 में डेयरी ने 10 हजार टन क्षमता वाला कोल्ड स्टोरेज भी बनाया था। इससे आलू को सुरक्षित रखने और जरूरत के अनुसार प्रोसेसिंग के लिए इस्तेमाल करने में मदद मिलती है।

इस प्लांट का विस्तार भारत में आलू से बने तैयार खाद्य उत्पादों के कारोबार के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वर्ष 2025-26 में भारत ने करीब 2.77 लाख टन मूल्यवर्धित आलू उत्पादों का निर्यात किया, जिनकी कीमत लगभग 2,744.50 करोड़ रुपये थी। ऐसे में नई उत्पादन क्षमता से घरेलू बाजार के साथ निर्यात के अवसर भी बढ़ सकते हैं। प्रधानमंत्री ने इसी दौरे के दौरान बनास डेयरी की अन्य परियोजनाओं का भी उद्घाटन किया, जिनमें पालनपुर का आधुनिक भंडारण सिस्टम शामिल है। इन परियोजनाओं से क्षेत्र में कृषि और डेयरी आधारित उद्योगों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।