‘रील्स बनाने के लिए छापेमारी’, के.एन. नेहरू के ठिकानों पर कार्रवाई को लेकर स्टालिन ने विजय सरकार पर उठाए सवाल

तमिलनाडु में डीएमके नेता और पूर्व मंत्री के.एन. नेहरू से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी के बाद राज्य की राजनीति में विवाद गहरा गया है। डीएमके अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने इस कार्रवाई को लेकर मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार की जांच के नाम पर की जा रही कार्रवाई को राजनीतिक प्रचार का रूप दिया जा रहा है। स्टालिन के मुताबिक, तिरुचिरापल्ली ईस्ट उपचुनाव से पहले सोशल मीडिया पर रील्स बनाने और मुख्यमंत्री को राजनीतिक बयानबाजी का मौका देने के लिए छापेमारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्रवाइयों से डीएमके कार्यकर्ताओं का मनोबल कमजोर नहीं होगा।

दरअसल, सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (DVAC) ने 29 अक्टूबर को के.एन. नेहरू से जुड़े 25 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई नगर प्रशासन एवं जल आपूर्ति विभाग में कथित भर्ती घोटाले की जांच के तहत की गई। मामले में करीब 634 करोड़ रुपये की कथित अनियमितताओं की पड़ताल की जा रही है। आरोप है कि सरकारी पदों पर नियुक्ति दिलाने के बदले उम्मीदवारों से रिश्वत ली गई थी। इस मामले में मद्रास हाईकोर्ट के निर्देश पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जांच एजेंसी तलाशी के दौरान दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर रही है, ताकि कथित लेनदेन और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों का पता लगाया जा सके। हालांकि, मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

छापेमारी पर प्रतिक्रिया देते हुए स्टालिन ने राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा जैसे मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने के लिए इस कार्रवाई को प्रचार का विषय बनाया जा रहा है। स्टालिन ने सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) सरकार पर विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने का आरोप भी लगाया। उनके बयान के बाद राज्य में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। हालांकि, स्टालिन के इन दावों को लेकर सरकार का पक्ष और जांच एजेंसी की आधिकारिक प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी।

इस बीच, के.एन. नेहरू ने मामले में कानूनी लड़ाई जारी रखी है। मद्रास हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। हाईकोर्ट ने 26 अक्टूबर को उनकी समीक्षा याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने विशेष अनुमति याचिका दाखिल की। एक ओर जांच एजेंसी कथित भर्ती अनियमितताओं से जुड़े सबूत जुटा रही है, वहीं दूसरी ओर नेहरू के खिलाफ कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। अब इस मामले में आगे की जांच और अदालतों में होने वाली सुनवाई पर नजर रहेगी।

के.एन. नेहरू के ठिकानों पर छापेमारी और स्टालिन के बयान ने तमिलनाडु की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। डीएमके इस कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध से जोड़कर देख रही है, जबकि जांच का आधिकारिक आधार कथित भर्ती घोटाले के आरोप हैं। फिलहाल मामले की जांच जारी है और आरोपों की सच्चाई सामने आने के लिए कानूनी प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है। आने वाले दिनों में जांच की प्रगति और सरकार की प्रतिक्रिया इस विवाद की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होगी।