180 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी नमो भारत, 38 हाईटेंशन लाइनें होंगी शिफ्ट

दिल्ली से हरियाणा के पानीपत और करनाल तक नमो भारत ट्रेन चलाने की तैयारी में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। प्रस्तावित दिल्ली-पानीपत-करनाल रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) कॉरिडोर के निर्माण में बिजली की लाइनें बाधा न बनें, इसके लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (NCRTC) और टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (TPDDL) के बीच समझौता हुआ है। इसके तहत कॉरिडोर के रास्ते में आने वाली हाईटेंशन बिजली लाइनों और अन्य विद्युत उपकरणों को जरूरत के अनुसार दूसरी जगह स्थानांतरित किया जाएगा। इस कदम से परियोजना के निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

इस परियोजना के रास्ते में आने वाली 38 हाईटेंशन बिजली लाइनों को शिफ्ट किया जाना है। इनमें 765 केवी, 400 केवी, 132 केवी और 66 केवी की बिजली लाइनें शामिल हैं। इसके अलावा 33 केवी और 11 केवी की लाइनों, कम वोल्टेज वाले नेटवर्क, ट्रांसफॉर्मर और अन्य विद्युत उपकरणों को भी जरूरत के अनुसार स्थानांतरित किया जाएगा। बिजली की इन लाइनों को शिफ्ट करना तकनीकी रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन करना और बिजली आपूर्ति को सुचारु बनाए रखना जरूरी होगा। इस काम के लिए संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित किया जाएगा।

दिल्ली-पानीपत-करनाल नमो भारत कॉरिडोर की प्रस्तावित लंबाई करीब 136.3 किलोमीटर है। इस पर कुल 21 स्टेशन बनाने की योजना है, जिनमें छह दिल्ली और 15 हरियाणा में होंगे। कॉरिडोर का अधिकांश हिस्सा एलिवेटेड होगा, जबकि कुछ हिस्से में भूमिगत ट्रैक बनाया जाएगा। इस परियोजना का उद्देश्य दिल्ली और हरियाणा के प्रमुख शहरों के बीच तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है। इससे नौकरी, कारोबार और पढ़ाई के लिए रोजाना यात्रा करने वाले लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

इस कॉरिडोर पर चलने वाली नमो भारत ट्रेनों की अधिकतम डिजाइन गति 180 किलोमीटर प्रति घंटा होगी, जबकि प्रस्तावित परिचालन गति करीब 160 किलोमीटर प्रति घंटा है। इससे दिल्ली और हरियाणा के बीच यात्रा का समय कम करने में मदद मिल सकती है। परियोजना पूरी होने के बाद सड़क मार्ग पर निर्भरता घटाने और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में बढ़ते यातायात के दबाव को कम करने में भी सहायता मिलने की उम्मीद है। हालांकि, वास्तविक यात्रा समय और ट्रेनों के परिचालन से जुड़ी सुविधाएं सेवा शुरू होने के बाद निर्धारित व्यवस्था पर निर्भर करेंगी।

बिजली की लाइनों को स्थानांतरित करने के लिए NCRTC और TPDDL के बीच हुआ समझौता इस महत्वाकांक्षी परियोजना को आगे बढ़ाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। तय योजना के अनुसार, बिजली नेटवर्क की शिफ्टिंग पूरी होने से निर्माण कार्य में आने वाली तकनीकी बाधाओं को दूर करने में मदद मिलेगी। दिल्ली, पानीपत और करनाल को जोड़ने वाला यह कॉरिडोर क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करने के साथ यात्रियों को तेज और बेहतर परिवहन विकल्प उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।