मथुरा में आयोजित ‘ब्रजरज उत्सव 2026’ में स्वदेशी उत्पाद पर्यटकों और श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद की ओर से आयोजित इस उत्सव में खादी, ग्रामोद्योग और एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना के तहत तैयार सामानों की खूब खरीदारी हो रही है। योगी सरकार की पहल से स्थानीय कारीगरों और छोटे उद्यमियों को अपने उत्पादों को बड़े स्तर पर प्रदर्शित करने का अवसर मिल रहा है। पारंपरिक कारीगरी और आधुनिक डिजाइन के मेल से तैयार उत्पाद लोगों को काफी पसंद आ रहे हैं।
उत्सव में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के खास उत्पादों के स्टॉल लगाए गए हैं। इनमें आगरा के चमड़े के सामान, फिरोजाबाद की कांच की चूड़ियां, वाराणसी की सिल्क साड़ियां और जरी-जरदोजी, लखनऊ की चिकनकारी, कन्नौज का इत्र, मथुरा की पोशाक और कंठी माला, मुजफ्फरनगर का गुड़, प्रयागराज के मूंज उत्पाद, अलीगढ़ के पीतल और टेक्सटाइल उत्पाद तथा मैनपुरी की तारकशी कला शामिल हैं। इन स्टॉलों के माध्यम से लोगों को प्रदेश की पारंपरिक कला और स्थानीय उत्पादों को करीब से जानने और खरीदने का मौका मिल रहा है।
उत्तर प्रदेश खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड की ओर से उत्सव में खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों की बिक्री के लिए 21 स्टॉल लगाए गए हैं। यहां पारंपरिक खादी के कपड़ों के साथ युवाओं की पसंद को ध्यान में रखकर तैयार किए गए आधुनिक डिजाइन के परिधान भी उपलब्ध हैं। इसके अलावा हस्तनिर्मित आभूषण, मिट्टी के उत्पाद, हर्बल सामग्री, जैविक गुड़ और अगरबत्ती जैसे सामान भी लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। जिला ग्रामोद्योग अधिकारी अनिल कुमार के अनुसार, वाराणसी, मथुरा, लखनऊ, आगरा, फिरोजाबाद, एटा और मैनपुरी सहित कई जिलों के उत्पादों की अच्छी मांग देखने को मिल रही है।
इससे स्थानीय कारीगरों को आर्थिक लाभ मिल रहा है।उत्सव में एक जिला एक व्यंजन (ओडीओसी) योजना के तहत ब्रज के पारंपरिक व्यंजनों के स्टॉल भी लगाए गए हैं। पर्यटक मथुरा के मशहूर पेड़े और अन्य स्थानीय व्यंजनों का स्वाद ले रहे हैं। वहीं, उपायुक्त उद्योग चंद्रभान सिंह ने बताया कि सरकार की मंशा के अनुरूप ओडीओपी और ओडीओसी उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए उत्सव में कुल 40 स्टॉल लगाए गए हैं। इन स्टॉलों के जरिए छोटे उद्यमियों और स्थानीय कारीगरों को अपने उत्पादों के लिए बड़ा बाजार मिल रहा है।
ब्रजरज उत्सव 2026 स्थानीय कला, संस्कृति और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण मंच बन रहा है। यहां होने वाली खरीदारी से कारीगरों और छोटे कारोबारियों की आय बढ़ाने में मदद मिल रही है। साथ ही, खादी और देश में बने उत्पादों को अपनाने का संदेश भी मजबूत हो रहा है। इस तरह यह उत्सव ‘वोकल फॉर लोकल’ और आत्मनिर्भर भारत की भावना को आगे बढ़ाने के साथ उत्तर प्रदेश के पारंपरिक हुनर को नई पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभा रहा है।





