नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि दोनों देशों के बीच समझौते को लेकर ज्यादातर मुद्दों पर चर्चा पूरी हो चुकी है और अब इसे अंतिम रूप देने की दिशा में काम किया जा रहा है। इस समझौते से दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को मजबूती मिलने और भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार में नए अवसर खुलने की उम्मीद है। हालांकि, समझौते की अंतिम शर्तों और इसे लागू करने की तारीख को लेकर आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।पीयूष गोयल ने नीदरलैंड के हेग में आयोजित भारत-नीदरलैंड बिजनेस फोरम में यह जानकारी दी। वह दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर नीदरलैंड पहुंचे थे। उनके साथ भारतीय कारोबारियों और स्टार्टअप से जुड़े प्रतिनिधियों का एक समूह भी शामिल था। गोयल ने बताया कि भारत ने पिछले साढ़े चार वर्षों में नौ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पूरे किए हैं। इन समझौतों का उद्देश्य भारतीय कंपनियों के लिए नए बाजार खोलना, निर्यात को बढ़ावा देना और वैश्विक व्यापार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाना है।
भारत और अमेरिका ने फरवरी 2026 में द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण के लिए एक रूपरेखा की घोषणा की थी। इसके बाद दोनों देशों के बीच विभिन्न व्यापारिक मुद्दों पर बातचीत जारी रही। अमेरिका की टैरिफ नीतियों में बदलाव और व्यापार से जुड़ी शर्तों के कारण यह समझौता महत्वपूर्ण बना हुआ है। भारत की कोशिश है कि उसके उत्पादों को अमेरिकी बाजार में बेहतर पहुंच मिले और भारतीय कारोबारियों को प्रतिस्पर्धी परिस्थितियों में काम करने का अवसर मिले। साथ ही, समझौते की शर्तें तय करते समय घरेलू उद्योगों, किसानों और छोटे कारोबारियों के हितों की रक्षा पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी भारत के साथ व्यापार समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। दोनों देशों के बीच बातचीत का मुख्य उद्देश्य व्यापारिक बाधाओं को कम करना, बाजार तक पहुंच बेहतर बनाना और आर्थिक सहयोग को बढ़ाना है। हालांकि, टैरिफ, बाजार पहुंच और कुछ संवेदनशील व्यापारिक क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों पर अंतिम सहमति समझौते की शर्तें तय करने में अहम भूमिका निभाएगी। जब तक दोनों सरकारें औपचारिक घोषणा नहीं करतीं, तब तक समझौते की सभी शर्तों को अंतिम नहीं माना जा सकता।
इस समझौते का असर भारत के कई प्रमुख क्षेत्रों पर पड़ सकता है। अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों की पहुंच बेहतर होने से कपड़ा, इंजीनियरिंग, दवा और अन्य निर्यात आधारित उद्योगों को नए अवसर मिल सकते हैं। इसके अलावा, दोनों देशों के बीच निवेश, तकनीक, ऊर्जा और विनिर्माण के क्षेत्र में सहयोग बढ़ने की संभावनाएं भी हैं। हालांकि, वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि समझौते में टैरिफ और बाजार पहुंच को लेकर क्या शर्तें तय की जाती हैं।
फिलहाल, भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत महत्वपूर्ण चरण में है। पीयूष गोयल के बयान से संकेत मिलता है कि ज्यादातर मुद्दों पर चर्चा पूरी हो चुकी है और दोनों देश शेष विषयों को सुलझाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। अब सबकी नजर समझौते की अंतिम घोषणा पर है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि दोनों देश व्यापारिक संबंधों को किस दिशा में ले जाना चाहते हैं और भारतीय कारोबारियों को इससे कितना लाभ मिल सकता है।





