बिहार के भागलपुर में गंगा नदी का जलस्तर घटने के साथ ही बियाडा घाट पर गतिविधियां तेज हो गई हैं। पानी कम होने के कारण घाट पर बना प्लेटफॉर्म करीब 50 मीटर आगे खिसक गया है। इस बदलाव का असर जलयान सेवा पर भी पड़ सकता है, इसलिए संबंधित व्यवस्था पर नजर रखी जा रही है। गंगा के जलस्तर में बदलाव के कारण घाट पर आने-जाने और जलयान के संचालन से जुड़ी व्यवस्थाओं में भी बदलाव की जरूरत पड़ सकती है।
गंगा का पानी घटने से नदी के किनारे की स्थिति बदलने लगी है। जलस्तर कम होने पर घाट और नदी के बीच की दूरी बढ़ जाती है, जिससे यात्रियों के चढ़ने-उतरने और जलयान तक पहुंचने में परेशानी हो सकती है। इसी वजह से बियाडा घाट पर प्लेटफॉर्म को आगे खिसकाया गया है, ताकि यात्रियों और जलयान के बीच संपर्क बनाए रखने में मदद मिल सके।
जलयान सेवा के लिए नदी में पानी की पर्याप्त गहराई होना जरूरी है। जलस्तर घटने पर जलयान के संचालन के रास्ते में उथले हिस्से आने की आशंका रहती है। ऐसे में सुरक्षित संचालन के लिए नदी की स्थिति और पानी की गहराई पर नजर रखना महत्वपूर्ण हो जाता है। हालांकि, जलयान सेवा के संचालन पर किसी तरह का अंतिम फैसला संबंधित विभाग की व्यवस्था और स्थिति के आकलन के आधार पर ही लिया जाएगा।
गंगा के जलस्तर में बदलाव का असर केवल जलयान सेवा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि घाट पर स्थानीय लोगों की आवाजाही और अन्य गतिविधियां भी इससे प्रभावित हो सकती हैं। ऐसे में प्लेटफॉर्म की स्थिति और यात्रियों की सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी है।
फिलहाल भागलपुर के बियाडा घाट पर प्लेटफॉर्म के 50 मीटर आगे खिसकने के बाद जलयान सेवा की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। आने वाले समय में गंगा का जलस्तर किस तरह बदलता है, इसी के आधार पर घाट और जलयान संचालन से जुड़ी व्यवस्थाओं में आगे बदलाव किए जा सकते हैं।





